भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना को लेकर विधानसभा में एक बार फिर सियासी घमासान देखने को मिला। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने सरकार पर आरोप लगाया कि योजना से लगातार बहनों के नाम काटे जा रहे हैं और नए पंजीयन की कोई तैयारी नहीं की जा रही है।
इस पर महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने सदन में लिखित जवाब देते हुए आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि योजना में पहले कुल पंजीकृत बहनों की संख्या 1 करोड़ 31 लाख 6 हजार 525 थी, जो घटकर अब 1 करोड़ 25 लाख 29 हजार 51 रह गई है। यानी अब तक 5 लाख 77 हजार 474 महिलाओं के नाम सूची से हट चुके हैं।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि नाम कटने के प्रमुख कारणों में 60 वर्ष की आयु पूरी होना, लाभार्थी का निधन और अन्य अपात्रताएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 60 साल की उम्र पार करने के कारण 1 लाख 51 हजार से अधिक महिलाएं योजना के दायरे से बाहर हुई हैं, क्योंकि निर्धारित आयु के बाद पात्रता समाप्त हो जाती है।
वहीं महेश परमार ने सरकार को घेरते हुए कहा कि नाम कटने का सिलसिला जारी है, नए पंजीयन बंद हैं और 60 वर्ष की आयु पूरी होते ही योजना की राशि बंद कर दी जाती है, जबकि अन्य पेंशन योजनाओं में मात्र 600 रुपये मिलते हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बजट में राशि को 3000 रुपये तक बढ़ाने का कोई प्रावधान क्यों नहीं किया गया।
इस मुद्दे पर सदन में तीखी बहस हुई और लाड़ली बहना योजना को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है।

