बिहार चुनाव 2025 के बीच ब्रह्मपुर विधानसभा सीट से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां जनसुराज पार्टी को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। भाजपा से नाराज़ होकर जनसुराज पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे सत्य प्रकाश तिवारी ने अचानक अपना नामांकन वापस ले लिया है। इस फैसले के बाद जनसुराज पार्टी अब इस सीट पर पूरी तरह मुकाबले से बाहर हो गई है।
जानकारी के मुताबिक, कुछ दिन पहले ही जनसुराज पार्टी ने सत्य प्रकाश तिवारी को उम्मीदवार घोषित किया था और उन्होंने औपचारिक रूप से नामांकन भी दाखिल कर दिया था। लेकिन पिछले कुछ दिनों से भाजपा के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र प्रधान और ऋतुराज सिन्हा लगातार उनसे संपर्क में थे। भाजपा नेताओं ने उन्हें पार्टी में वापसी के लिए मनाने की कोशिश जारी रखी, और आखिरकार सोमवार दोपहर करीब 1 बजे तिवारी ने नामांकन वापस ले लिया। इस बात की पुष्टि ब्रह्मपुर विधानसभा के रिटर्निंग ऑफिसर टेस लाल सिंह ने भी कर दी है।
राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा था कि सत्य प्रकाश तिवारी की साफ-सुथरी छवि और क्षेत्र में मजबूत पकड़ NDA उम्मीदवार हुलास पांडेय के लिए बड़ी चुनौती बन सकती थी। अगर तिवारी मैदान में टिके रहते, तो ब्रह्मपुर में भाजपा को वोटों का नुकसान उठाना पड़ सकता था। लेकिन भाजपा ने वक्त रहते डैमेज कंट्रोल करते हुए इस खतरे को टाल दिया। यही वजह है कि राजनीतिक विश्लेषक इसे भाजपा की रणनीतिक जीत बता रहे हैं।
हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि भाजपा और सत्य प्रकाश तिवारी के बीच किस तरह की सहमति या समझौता हुआ है। उन्होंने मीडिया से दूरी बनाए रखी है और इस पूरे घटनाक्रम पर कोई बयान नहीं दिया है।
स्थानीय राजनीति में इस कदम से हलचल मच गई है। माना जा रहा है कि तिवारी के नामांकन वापस लेने से जहां जनसुराज पार्टी की उम्मीदों को गहरा झटका लगा है, वहीं भाजपा ने अपने लिए एक बड़ी राजनीतिक राहत हासिल कर ली है। ब्रह्मपुर सीट, जो अब तक जनसुराज के लिए संभावित जीत की जगह मानी जा रही थी, अब पूरी तरह NDA के पक्ष में झुकती नज़र आ रही है।
ब्रह्मपुर की ये सियासी चालें इस बात का सबूत हैं कि बिहार की राजनीति में रणनीति ही सब कुछ है — और इस बार, भाजपा की चाल बिल्कुल सटीक बैठी है।

