बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले महागठबंधन के भीतर उठते अंतर्विरोध अब सतह पर दिखाई देने लगे हैं। रोहतास जिले की करगहर विधानसभा सीट पर महागठबंधन के दो सहयोगी दल, कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), एक ही सीट से अलग-अलग उम्मीदवार उतार चुके हैं। इस राजनीतिक टकराव ने महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़ा कर दिया है और यहां ‘फ्रेंडली फाइट’ की स्थिति बन गई है।
कांग्रेस के मौजूदा विधायक संतोष मिश्रा ने करगहर सीट से एक बार फिर नामांकन दाखिल किया। वहीं CPI के नेता महेंद्र गुप्ता ने भी अपना नामांकन पर्चा दाखिल किया और दावा किया कि वे महागठबंधन के अधिकृत उम्मीदवार हैं। महेंद्र गुप्ता का कहना है कि उन्हें CPI का सिंबल मिला है और वे तेजस्वी यादव के निर्देश पर चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि करगहर में इस बार बदलाव की जरूरत है। जनता पुराने चेहरे से ऊब चुकी है। मेरा लक्ष्य है कि महागठबंधन की सरकार राज्य में बने।
कांग्रेस उम्मीदवार संतोष मिश्रा ने इसे सियासी रणनीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि चुनावी राजनीति में ऐसी चीजें होती रहती हैं और महागठबंधन पूरी तरह एकजुट है। हालांकि, करगहर सीट पर दो महागठबंधन उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति बन गई है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इस स्थिति से विपक्ष यानी NDA को सीधा फायदा मिल सकता है। जिस तरह महागठबंधन के घटक दलों के बीच तालमेल की कमी नजर आ रही है, उससे पूरे जिले में गठबंधन की स्थिति कमजोर हो सकती है। करगहर की जनता अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि असली महागठबंधन उम्मीदवार कौन है। दोनों दलों के कार्यकर्ता अपनी-अपनी पार्टी के उम्मीदवार को समर्थन देने की अपील कर रहे हैं, जिससे जमीनी स्तर पर टकराव और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
लोगों का कहना है कि इस तरह की ‘फ्रेंडली फाइट’ महागठबंधन को नुकसान पहुंचा सकती है, खासकर ऐसे समय में जब चुनावी माहौल गर्म है और NDA पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर चुका है। यह स्थिति महागठबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

