बिहार विधानसभा चुनाव का माहौल गर्म है, और अब सीतामढ़ी जिले की परिहार सीट पर सियासी घमासान चरम पर पहुंच चुका है। आरजेडी की बागी और अब निर्दलीय प्रत्याशी रितु जायसवाल ने बीजेपी विधायक गायत्री देवी पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे राजनीतिक माहौल को हिला दिया है।
रितु जायसवाल का कहना है कि बीजेपी प्रत्याशी गायत्री देवी ने अपने नामांकन एफिडेविट में गड़बड़ी की है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक ने अपनी अचल संपत्ति के दो अलग-अलग आंकड़े दर्ज किए हैं—एक जगह 83 लाख और दूसरी जगह 59 लाख रुपये की संपत्ति बताई गई है। रितु ने सोशल मीडिया पर दस्तावेजों की तस्वीरें शेयर करते हुए कहा कि यह “नामांकन में बड़का खेल” हुआ है।
उन्होंने कहा कि चुनाव कानून के मुताबिक झूठा हलफनामा देना अपराध है, और अगर यह साबित हुआ तो गायत्री देवी को जीत के बाद भी अपनी सीट गंवानी पड़ सकती है।
दरअसल, रितु जायसवाल पहले आरजेडी से टिकट की उम्मीद कर रही थीं, लेकिन पार्टी ने परिहार से स्मिता पूर्वे को उम्मीदवार बनाया। बताया जाता है कि रितु को बेलसंड सीट से चुनाव लड़ने का ऑफर मिला था, लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया। उनका कहना है कि तेजस्वी यादव ने मेरा नाम फाइनल किया था, लेकिन कुछ दलालों के दबाव में फैसला बदल दिया गया।
रितु ने कहा, “अगर किसी जमीनी कार्यकर्ता को टिकट दिया जाता तो मैं पीछे हट जाती, लेकिन बिना जनाधार वाले व्यक्ति को उम्मीदवार बना दिया गया।”
अब बात करें परिहार सीट की—तो यह क्षेत्र नेपाल सीमा से सटा इलाका है, और 2008 में परिसीमन के बाद बनी इस सीट पर बीजेपी लगातार मजबूत रही है। 2010 में राम नरेश यादव ने बीजेपी के लिए जीत की शुरुआत की, और उसके बाद 2015 और 2020—दोनों बार गायत्री देवी ने जीत दर्ज की। पिछली बार उन्हें 73,420 वोट मिले थे, जबकि आरजेडी की उम्मीदवार को 71,851 वोट।
लेकिन इस बार समीकरण कुछ अलग हैं। अब मैदान में तीन दावेदार हैं—एनडीए से गायत्री देवी, आरजेडी से स्मिता पूर्वे और निर्दलीय रितु जायसवाल। रितु के आरोपों और उनके जबरदस्त जनसंपर्क अभियान ने इस सीट का माहौल पूरी तरह बदल दिया है।
अब देखना ये होगा कि ये आरोप चुनाव आयोग तक पहुंचते हैं या फिर सिर्फ चुनावी बयानबाज़ी तक सीमित रह जाएंगे। लेकिन इतना तय है—परिहार की इस सीट पर अब मुकाबला बेहद दिलचस्प हो चुका है।

