भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal में राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के प्रस्तावित भोपाल कूच को लेकर प्रशासन ने सख्ती दिखाई, जहां किसानों को शहर में प्रवेश से पहले ही रोक दिया गया।
किसानों की योजना फंदा टोल नाके पर जुटने की थी, लेकिन पुलिस ने पहले ही मोर्चा संभालते हुए उन्हें आगे बढ़ने नहीं दिया और कई जिलों में किसान नेताओं को नजरबंद कर दिया गया।
देवास और रतलाम समेत कई जगहों पर किसानों को घरों से निकलने से पहले ही ‘हाउस अरेस्ट’ कर लिया गया, जिससे पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।
दरअसल किसान अपनी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने जा रहे थे, जिसे देखते हुए राजधानी में हाई अलर्ट घोषित किया गया और शहर की सीमाओं पर कड़ी निगरानी रखी गई।
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष शिवकुमार कक्काजी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार किसानों की आवाज से डर गई है और उन्हें जबरन रोका जा रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर पर और बड़ा रूप ले सकता है।
किसानों की प्रमुख मांगों में गेहूं खरीदी व्यवस्था में सुधार, भावांतर योजना का लाभ, कर्ज माफी, फसलों का उचित न्यूनतम समर्थन मूल्य, प्राकृतिक आपदा पर पूर्ण मुआवजा और बिजली विभाग की मनमानी पर रोक शामिल है।
इसके अलावा मूंग की फसल की MSP पर खरीदी सुनिश्चित करने, खाद वितरण बढ़ाने और हर जिले में कृषि से जुड़ी जांच प्रयोगशालाएं स्थापित करने की मांग भी उठाई गई है।
फिलहाल प्रशासन की सख्ती और किसानों के विरोध के बीच यह मामला और गरमाता नजर आ रहा है, जिससे आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है।

