रतलाम। रतलाम जिले के जावरा स्थित प्रसिद्ध हुसैन टेकरी से छह महीने के मासूम बच्चे के अपहरण का सनसनीखेज मामला सामने आया, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। लेकिन राहत की बात यह रही कि रतलाम पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर इस चुनौतीपूर्ण मामले का खुलासा करते हुए बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया। पुलिस ने राजस्थान से जुड़े एक संगठित गिरोह के दो आरोपियों और एक बाल अपचारी को गिरफ्तार किया है। मासूम सयान को सुरक्षित उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया, जिसके बाद परिजनों ने राहत की सांस ली।
जानकारी के मुताबिक साहिल नाम का युवक अपने परिवार के साथ पिछले करीब 15 दिनों से हुसैन टेकरी में रुका हुआ था। 4 और 5 जून की दरमियानी रात वह अपने परिवार के साथ चिराग गेस्ट हाउस के पास एक दुकान के बाहर सो रहा था। इसी दौरान देर रात एक अज्ञात महिला, एक पुरुष और एक बच्चा भी आकर उनके पास ही सो गए। सुबह करीब साढ़े चार बजे जब साहिल की आंख खुली तो उसके होश उड़ गए। उसका छह माह का बेटा सयान गायब था और पास में सो रहे वे अज्ञात लोग भी वहां से लापता थे। परिवार ने आसपास काफी तलाश की, लेकिन जब बच्चे का कोई सुराग नहीं मिला तो तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने तुरंत विशेष टीम का गठन किया। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और साइबर इनपुट के आधार पर जांच शुरू की। जांच के दौरान करीब 200 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। घंटों की मेहनत और लगातार ट्रैकिंग के बाद संदिग्धों की लोकेशन शिवपुरी जिले में मिली, जिसके बाद रतलाम पुलिस ने शिवपुरी पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई की।
शिवपुरी जिले के कोलारस क्षेत्र में पुलिस ने सटीक घेराबंदी कर आरोपियों को पकड़ लिया और मासूम बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया। इस सफलता की पूरे प्रदेश में सराहना हो रही है। मुख्यमंत्री और डीजीपी ने भी पुलिस टीम की तत्परता और पेशेवर कार्रवाई की प्रशंसा की है। वहीं देर शाम हुसैन टेकरी समिति ने भी पुलिस अधिकारियों और जवानों का सम्मान किया।
अब इस मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या यह सिर्फ अपहरण की घटना थी या इसके पीछे मानव तस्करी का कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है? पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी राजस्थान के एक संगठित गिरोह से जुड़े बताए जा रहे हैं। ऐसे में जांच एजेंसियां इस पूरे मामले को मानव तस्करी के एंगल से भी खंगाल रही हैं।
पुलिस अब आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि अपहरण का असली मकसद क्या था, इस गिरोह में और कौन-कौन शामिल हैं और क्या प्रदेश में बच्चों की तस्करी से जुड़ा कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। फिलहाल पुलिस की त्वरित कार्रवाई से एक मासूम की जान बच गई, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और मानव तस्करी जैसे गंभीर मुद्दों पर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

