बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण की वोटिंग से ठीक पहले कैमूर जिले की मोहनिया सीट पर सियासी माहौल अचानक गर्म हो गया है। भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी संगीता कुमारी को यहां प्रचार के दौरान जनता के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। विरोध का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें लोग खुलकर अपने गुस्से का इज़हार करते नजर आ रहे हैं।
वीडियो में दिखता है कि जैसे ही संगीता कुमारी अपने समर्थकों के साथ गांव में प्रवेश करती हैं, ग्रामीण उन्हें घेर लेते हैं और जमकर नारेबाजी शुरू कर देते हैं। लोगों ने ‘मुर्दाबाद’ के नारे लगाए और सवाल दाग दिए — “विधायक जी, पाँच साल में हमारे गांव के लिए क्या किया आपने?” ग्रामीणों का आरोप है कि काम करवाने की गुहार लेकर वे कई बार उनके पास गए, लेकिन विधायक उनसे मिली तक नहीं।
गांववालों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें अब ऐसे नेताओं पर भरोसा नहीं रहा जो चुनाव के वक्त ही जनता को याद करते हैं। इसी बीच, उनके एक समर्थक द्वारा वीडियो न बनाने की हिदायत दी गई, जिससे भीड़ और भड़क उठी। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि संगीता कुमारी को बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ा।
सियासी दिलचस्पी की बात ये है कि संगीता कुमारी ने 2020 का चुनाव राजद के टिकट पर लड़ा था और उस वक्त भाजपा उम्मीदवार निरंजन राम को हराया था। लेकिन 2024 में उन्होंने पार्टी बदलकर भाजपा जॉइन कर ली और इस बार उसी पार्टी से मैदान में हैं। यही ‘दल-बदल’ अब उनके लिए भारी साबित होता दिख रहा है, क्योंकि जनता अब उनकी नीयत और वफादारी दोनों पर सवाल उठा रही है।
इस बीच, संगीता कुमारी ने सफाई देते हुए कहा कि वे जब मोहनिया क्षेत्र में घूम रहीं थीं, तभी एक यादव टोला में कुछ लोग अचानक इकट्ठा हो गए। उनका आरोप है कि ये वही लोग हैं जो नहीं चाहते कि एक महिला विधायक आगे बढ़े। वहीं, भभुआ में भाजपा प्रत्याशी भरत बिंद को भी विरोध का सामना करना पड़ा, जहां जनता ने उनसे पूछा — “पाँच साल में कितनी बार आए गाँव?”
दरअसल, 2020 में भभुआ से भरत बिंद राजद से जीते थे और मोहनिया से संगीता कुमारी, लेकिन अब दोनों भाजपा में शामिल हो चुके हैं। जनता का सवाल सीधा है — “जब हमने आपको एक पार्टी से जिताया, तो आपने पार्टी ही क्यों बदल ली?”
दोनों विधायकों के विरोध के वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, और इन घटनाओं ने कैमूर जिले की राजनीतिक गर्मी को चरम पर पहुँचा दिया है। अब देखना ये होगा कि जनता का यह गुस्सा मतपेटियों में कैसे झलकता है।

