आवारा कुत्ते का मासूम पर खौफनाक हमला! चेहरे पर लगे 100 से ज्यादा टांके, 2 घंटे चला ऑपरेशन

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने एक बार फिर आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्वालियर के बेहट थाना क्षेत्र के बेनीपुरा गांव में छह साल के एक मासूम बच्चे पर आवारा कुत्ते ने जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में बच्चे का चेहरा बुरी तरह घायल हो गया और उसे बचाने के लिए डॉक्टरों को करीब दो घंटे तक जटिल सर्जरी करनी पड़ी।

जानकारी के अनुसार, छह वर्षीय भरत अपने घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान अचानक एक आवारा कुत्ता उस पर झपट पड़ा। देखते ही देखते कुत्ते ने बच्चे को जमीन पर गिरा दिया और उसके चेहरे को बुरी तरह नोचना और चबाना शुरू कर दिया। मासूम की चीख-पुकार सुनकर परिजन और आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद बच्चे को कुत्ते के चंगुल से छुड़ाया।

गंभीर रूप से घायल भरत को तत्काल ग्वालियर के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने तुरंत इलाज शुरू किया। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चे के चेहरे पर बेहद गहरे घाव थे और स्थिति काफी गंभीर थी। करीब दो घंटे तक चले ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों को उसके चेहरे पर 100 से अधिक टांके लगाने पड़े।

बताया गया कि हमले में बच्चे के होंठ भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। डॉक्टरों के सामने प्लास्टिक सर्जरी के जरिए होंठों को दोबारा सामान्य आकार देना बड़ी चुनौती थी। संक्रमण के खतरे को देखते हुए बच्चे को हाई डोज एंटीबायोटिक्स और एंटी रैबीज इंजेक्शन भी दिए गए हैं। फिलहाल मासूम की हालत स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज जारी है।

इस घटना के बाद बेनीपुरा गांव सहित आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से आवारा कुत्तों का आतंक बना हुआ है, लेकिन नगर निगम और प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों को पकड़ने और उनकी नसबंदी जैसी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि आवारा कुत्तों की समस्या का जल्द से जल्द स्थायी समाधान किया जाए, ताकि भविष्य में किसी और मासूम को इस तरह की दर्दनाक घटना का शिकार न होना पड़े। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

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