भोपाल। उज्जैन में वीर भारत न्यास को महज एक रुपए में सरकारी जमीन दिए जाने के मुद्दे पर कांग्रेस के भीतर अलग-अलग बयान सामने आने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मामले को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उन आरोपों को खारिज करते हुए सरकार को क्लीन चिट दे दी। इसके बाद पार्टी के भीतर मतभेद की चर्चाएं तेज हो गईं।
अब इस पूरे विवाद पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि इसे पार्टी के अंदरूनी मतभेद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक जीतू पटवारी ने उन्हें मिली जानकारी के आधार पर अपनी बात रखी थी, जबकि दिग्विजय सिंह ने उपलब्ध दस्तावेजों और अपने अनुभव के आधार पर बयान दिया। कांग्रेस में सही तथ्यों को स्वीकार करने में कोई हिचक नहीं होती और इसे फूट या टकराव कहना उचित नहीं है।
दरअसल, पूरा विवाद उज्जैन में वीर भारत न्यास को एक रुपए में जमीन आवंटित किए जाने को लेकर शुरू हुआ था। इस मुद्दे पर जीतू पटवारी ने सरकार पर करीब 500 करोड़ रुपए की जमीन कौड़ियों के दाम देने का आरोप लगाया था और इसे बड़ा घोटाला बताया था।
लेकिन 27 जून को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिग्विजय सिंह ने अपनी ही पार्टी के आरोपों से अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरे मामले का गहराई से अध्ययन किया है और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह आरोप सही नहीं हैं। उनका कहना था कि संबंधित भवन और जमीन का आवंटन नियमों के तहत किया गया है और वीर भारत न्यास कोई निजी ट्रस्ट नहीं, बल्कि एक शासकीय संस्था है।
अब इस मामले में कांग्रेस की ओर से अलग-अलग बयान आने के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। हालांकि पीसी शर्मा ने साफ कर दिया है कि यह किसी तरह की अंदरूनी कलह नहीं, बल्कि अलग-अलग जानकारी के आधार पर दिए गए बयान हैं। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में कांग्रेस इस मुद्दे पर अपना आधिकारिक और अंतिम रुख क्या तय करती है।

