‘मन की व्यथा और दिल की जुबान’ बनी युवाओं की पसंद! कोविड के अकेलेपन से जन्मी 104 पन्नों की यह किताब बटोर रही सराहना

इंदौर। अगर आप कविता, शायरी और दिल की अनकही बातों को पढ़ना पसंद करते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। उत्तर प्रदेश के झांसी निवासी रोहित खरे की नई पुस्तक ‘मन की व्यथा और दिल की जुबान’ इन दिनों पाठकों, खासकर युवाओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

104 पन्नों की इस पुस्तक में लेखक ने जिंदगी के अनकहे एहसास, रिश्तों की जटिलताएं, प्रेम, अकेलापन और मन के भावों को बेहद सरल और संवेदनशील शब्दों में पिरोया है। लेखक का कहना है कि यह किताब उन भावनाओं को आवाज देती है, जिन्हें लोग महसूस तो करते हैं, लेकिन अक्सर शब्दों में बयां नहीं कर पाते।

रोहित खरे बताते हैं कि कोविड-19 के दौरान लोगों के भीतर बढ़ते अकेलेपन और मानसिक संघर्ष ने उन्हें एक बार फिर लेखन की ओर लौटने के लिए प्रेरित किया। उसी दौर में लिखी गई कविताओं और भावनाओं का संग्रह आज ‘मन की व्यथा और दिल की जुबान’ के रूप में पाठकों के सामने है।

बुकलीफ पब्लिशिंग द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक अब सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उपलब्ध है। इसे Barnes & Noble और Ingram जैसे वैश्विक बुक नेटवर्क पर पढ़ा और खरीदा जा सकता है। वहीं भारतीय पाठकों के लिए यह Amazon India और Flipkart पर भी उपलब्ध है। पुस्तक के पेपरबैक संस्करण की कीमत 350 रुपये रखी गई है।

रोहित खरे ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से एमबीए किया है। वे कॉलेज के दिनों से ही कविता और शायरी लिखते आ रहे हैं। लेखन के अलावा उन्होंने सिंगर, रैपर और गीतकार के रूप में भी अपनी पहचान बनाई है। वे ‘इंडियाज़ टैलेंट फाइट’ के सातवें सीजन, 9XM और दूरदर्शन के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘किस्मे कितना है दम’ में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं।

लेखक का दावा है कि पुस्तक को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। खासतौर पर युवा पाठकों को इसकी सरल भाषा और भावनात्मक कविताएं काफी पसंद आ रही हैं। इस किताब का उद्देश्य सिर्फ कविता पढ़ाना नहीं, बल्कि उन जज्बातों को शब्द देना है, जिन्हें लोग अक्सर अपने दिल में दबाकर रख लेते हैं।

‘मन की व्यथा और दिल की जुबान’ आज हिंदी कविता और आधुनिक शायरी के पाठकों के लिए एक नए और संवेदनशील विकल्प के रूप में सामने आ रही है।

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