इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में आयोजित स्वच्छता कार्यशाला में राजस्थान के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर और विशेषज्ञ के.के. गुप्ता ने बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता सिर्फ सरकारी अभियान नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है। जब तक लोगों की सोच नहीं बदलेगी, तब तक कोई भी शहर पूरी तरह स्वच्छ नहीं बन सकता।
कार्यशाला में इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव, बुरहानपुर महापौर माधुरी पटेल, संभागायुक्त सुदाम खाड़े और नगर निकायों के कई अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान के.के. गुप्ता ने कहा कि स्वच्छता केवल कागजों और रिपोर्टों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हर घर से गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष श्रेणी के कचरे का अलग-अलग संग्रह किया जाना जरूरी है। इससे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण होगा और शहरों को साफ रखने में मदद मिलेगी।
के.के. गुप्ता ने प्लास्टिक प्रदूषण पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सिर्फ आम लोगों पर जुर्माना लगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि अवैध प्लास्टिक बनाने और बेचने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करनी होगी। जब तक उत्पादन स्तर पर नियंत्रण नहीं होगा, तब तक प्लास्टिक मुक्त शहर का सपना अधूरा रहेगा।
उन्होंने राजस्थान के डूंगरपुर मॉडल का जिक्र करते हुए बताया कि वहां यदि कोई व्यक्ति गंदगी की फोटो भेजता था, तो उसे पुरस्कृत किया जाता था। वहीं, गंदगी फैलाने वालों से स्पॉट फाइन भी वसूला जाता था। उनका कहना था कि कानून का सख्ती से पालन ही स्वच्छता की सबसे बड़ी कुंजी है।
कार्यशाला के दौरान उन्होंने शहरों में खाली पड़े भूखंडों को गंदगी का बड़ा कारण बताया। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे प्लॉट मालिकों को नोटिस जारी किए जाएं और सफाई नहीं कराने पर जुर्माना वसूला जाए। जरूरत पड़ने पर ऐसे भूखंडों को सील करने पर भी विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने बाजारों और प्रमुख सड़कों की सफाई रात में करने का सुझाव देते हुए कहा कि इससे सुबह शहर साफ-सुथरा नजर आएगा और दिन में यातायात भी प्रभावित नहीं होगा। साथ ही सार्वजनिक शौचालयों में पानी, बिजली और नियमित सफाई जैसी सुविधाएं हर समय उपलब्ध रहनी चाहिए।
के.के. गुप्ता ने बताया कि राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा स्वयं स्वच्छता कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग करते हैं। उनका मानना है कि शीर्ष स्तर पर निगरानी होने से प्रशासन की जवाबदेही बढ़ती है और अभियान को गति मिलती है।
उन्होंने कहा कि इंदौर और डूंगरपुर की स्वच्छता की सोच में कोई अंतर नहीं है। फर्क सिर्फ शहरों के आकार का है। यदि प्रशासन और जनता मिलकर काम करें, तो कोई भी शहर स्वच्छता के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब हर नागरिक अपने घर, गली और मोहल्ले की सफाई को अपनी जिम्मेदारी माने। क्योंकि स्वच्छता सिर्फ झाड़ू लगाने का काम नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन है।

