भोपाल/दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर अब सियासी पारा चढ़ने लगा है। 30 जुलाई को होने वाले मतदान के लिए उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और बीजेपी-कांग्रेस दोनों ने अपनी पूरी ताकत मैदान में उतार दी है। आने वाले दिनों में स्टार प्रचारकों की एंट्री के साथ चुनावी माहौल और गर्म होने की उम्मीद है।
इस बार का उपचुनाव कई मायनों में खास माना जा रहा है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर तो है ही, लेकिन आजाद समाज पार्टी की मौजूदगी ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तीसरे मोर्चे की सक्रियता कई सीटों पर वोटों के समीकरण बदल सकती है।
दतिया उपचुनाव में कुल 22 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनमें नोटा भी शामिल है। उम्मीदवारों की संख्या अधिक होने के कारण निर्वाचन आयोग को दो बैलेट यूनिट का इस्तेमाल करना पड़ेगा, क्योंकि एक यूनिट में अधिकतम 16 प्रत्याशियों के नाम और चुनाव चिह्न ही प्रदर्शित किए जा सकते हैं।
चुनाव प्रचार 28 जुलाई की शाम को थम जाएगा। इसके बाद 30 जुलाई को मतदान होगा और 3 अगस्त को मतगणना के साथ नतीजों का ऐलान किया जाएगा। ऐसे में सभी दलों के पास अब मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए सीमित समय बचा है।
अगर दतिया के चुनावी इतिहास पर नजर डालें, तो पिछले डेढ़ दशक में यहां कई दिलचस्प मुकाबले देखने को मिले हैं। साल 2008 और 2013 में बीजेपी के डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने जीत हासिल की। 2018 में मुकाबला बेहद कांटे का रहा, जहां नरोत्तम मिश्रा बेहद कम अंतर से चुनाव जीते। वहीं, 2023 में कांग्रेस ने 15 साल बाद वापसी करते हुए बड़ा उलटफेर किया और राजेंद्र भारती ने जीत दर्ज की।
अब एक बार फिर दतिया की जनता के सामने नया फैसला करने का मौका है। बीजेपी अपने अनुभवी नेताओं और स्टार प्रचारकों के सहारे मैदान में उतर रही है, तो कांग्रेस भी इस सीट को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है।
दतिया का यह उपचुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे मध्य प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने वाले अहम मुकाबलों में भी गिना जा रहा है। अब देखना होगा कि जनता किस पर भरोसा जताती है और 3 अगस्त को किसके सिर जीत का ताज सजता है।

