भागीरथपुरा कांड के बाद सरकार सख्त, अब हर बोरिंग, कुएं और तालाब का बनेगा ‘हेल्थ रिपोर्ट कार्ड’

इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अब प्रदेशभर में जल स्रोतों की निगरानी और जांच का विशेष अभियान चलाया जाएगा। सरकार ने तय किया है कि हर बोरिंग, कुएं, तालाब और भूजल स्रोत का एक ‘हेल्थ रिपोर्ट कार्ड’ तैयार किया जाएगा।

प्रशासन के अनुसार, जल स्रोतों की जियो-टैगिंग भी की जाएगी, ताकि उनकी ऑनलाइन मॉनिटरिंग संभव हो सके। इसके साथ ही प्रदूषित जल स्रोतों की पहचान कर उन पर विशेष नजर रखी जाएगी। सरकार का कहना है कि नदियों, तालाबों और भूजल स्रोतों को अतिक्रमण, कचरा डंपिंग और औद्योगिक प्रदूषण से बचाने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

जल स्रोतों की गुणवत्ता की नियमित जांच के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीमें काम करेंगी। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि पानी की गुणवत्ता से जुड़ी किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

दरअसल, दिसंबर 2025 में इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से करीब 36 लोगों की मौत हो गई थी। स्थानीय लोगों का आरोप था कि कई दिनों से लोग बीमार पड़ रहे थे, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। घटना के बाद पूरे देश में इस मामले ने सुर्खियां बटोरीं और छह लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई।

हालांकि, इस दर्दनाक हादसे को सात महीने बीत जाने के बाद भी जिम्मेदारी पूरी तरह तय नहीं हो सकी है। मामले से जुड़ी कई जनहित याचिकाएं अब भी हाई कोर्ट में लंबित हैं और सुनवाई के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं।

अब सरकार का दावा है कि जल स्रोतों का हेल्थ रिपोर्ट कार्ड तैयार करने और नियमित सैंपलिंग की व्यवस्था से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नई व्यवस्था से लोगों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल मिल पाएगा, या फिर यह फैसला भी केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *