ये तो जुमलापत्र है…’, NDA के संकल्प पत्र पर राजद की पहली प्रतिक्रिया आई सामने, कहा- 20 साल का ‘रिपोर्ट कार्ड’ जारी करने बजाय ये लोग…

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए ने आज अपना संकल्प पत्र जारी कर दिया है, लेकिन जैसे ही यह घोषणापत्र सामने आया, आरजेडी ने इस पर जोरदार हमला बोल दिया। पार्टी के प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा — “इसे घोषणापत्र नहीं, जुमलापत्र कहना ज्यादा सही होगा। बीते चुनावों में एनडीए के नेता जो-जो वादे करते आए हैं, वो सब सिर्फ जुमले साबित हुए हैं — और इसे खुद उनके नेताओं ने कई बार स्वीकार भी किया है।”

चित्तरंजन गगन ने आगे कहा कि एनडीए की सरकार नकलची बन चुकी है — न कोई विजन, न कोई मिशन। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव ने जो घोषणाएं की थीं, एनडीए ने उन्हीं की नकल कर अपने संकल्प पत्र में शामिल कर लिया। उन्होंने तंज कसा कि पिछले बीस साल से बिहार में एनडीए की सरकार है, लेकिन आज तक उन्होंने विधानसभा चुनाव के लिए कोई घोषणापत्र जारी नहीं किया था।
2015 में जब नीतीश कुमार और राजद एक साथ थे, तब ‘सात निश्चय’ कार्यक्रम लाया गया था। अब जब इंडिया गठबंधन ने ‘तेजस्वी प्रण’ के नाम से अपना संकल्प पत्र जारी किया है, तो एनडीए ने भी नकल करते हुए अपने घोषणापत्र का नाम ‘संकल्प पत्र’ रख दिया है। जबकि, उन्हें अब तक के अपने बीस सालों की सरकार का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखना चाहिए था।

राजद प्रवक्ता ने एनडीए से कई तीखे सवाल दागे — “बीस साल से सरकार में रहने के बाद भी बिहार की हालत 2005 से भी खराब क्यों हो गई? नीति आयोग की रैंकिंग में बिहार हर पैमाने पर आखिर फिसड्डी क्यों है? तीन करोड़ से ज्यादा लोग रोजी-रोटी की तलाश में राज्य से पलायन क्यों कर रहे हैं? लाखों रिक्त पदों के बावजूद नौजवानों को नौकरी के लिए लाठियां क्यों खानी पड़ रही हैं?”

उन्होंने आगे कहा — “बेहतर शिक्षा और इलाज के लिए लोगों को अब भी दूसरे राज्यों का रुख क्यों करना पड़ रहा है? कानून-व्यवस्था बिगड़ी क्यों है? भ्रष्टाचार चरम पर क्यों है? बीस सालों में बिहार में एक भी बड़ा उद्योग क्यों नहीं लगा? किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य क्यों नहीं मिलता? और छोटे व्यवसाय लगातार बंद क्यों हो रहे हैं?”

चित्तरंजन गगन ने कहा कि अगर एनडीए में ज़रा भी ईमानदारी होती, तो वे नकल किया हुआ घोषणापत्र जारी करने की बजाय अपने बीस साल का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखते — ताकि लोग देख पाते कि वादों का पहाड़ आखिर हकीकत में कितना खोखला है।

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