दरभंगा से इस वक्त की बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है, जहां भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने शनिवार को मीडिया से बातचीत के दौरान कई बड़े और विवादित बयान दिए।
चौबे ने बिहार की राजनीति, मुस्लिम समुदाय और जनसंख्या नियंत्रण जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी — और उनके इस बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।
अश्विनी चौबे ने कहा कि महागठबंधन की पार्टियां मुस्लिम समुदाय को सिर्फ वोट बैंक के रूप में देखती हैं, जबकि भाजपा उन्हें देश का “भाग्यविधाता” मानती है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने हमेशा सबके लिए समान रूप से काम किया है — चाहे स्वास्थ्य हो, शिक्षा हो, सड़क, बिजली या पानी की सुविधा — लेकिन अफसोस की बात यह है कि इतने विकास कार्यों के बावजूद मुस्लिम समाज का समर्थन उस अनुपात में नहीं मिल पाता।
जनसंख्या नियंत्रण पर बोलते हुए चौबे ने कहा कि देश में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ रही है और अब यह लगभग 25 प्रतिशत के करीब पहुंच चुकी है।
उन्होंने दावा किया कि हिंदू समाज में जहां अधिकतर परिवार दो बच्चों पर रुक जाते हैं, वहीं मुस्लिम समाज में औसतन तीन या उससे अधिक बच्चे होते हैं।
विवादित बयान देते हुए उन्होंने कहा — “अगर ऐसा ही चलता रहा तो जनसंख्या संतुलन बिगड़ जाएगा। इसलिए मैं हिंदू समाज से अपील करता हूं कि वे भी तीन या उससे अधिक बच्चे पैदा करें, ताकि देश में जनसंख्या का संतुलन बना रहे।”
अश्विनी चौबे ने आगे कहा कि भाजपा सरकार विकास के लिए काम करती है — किसी धर्म या जाति के लिए नहीं।
उन्होंने कहा, “हम सबको साथ लेकर चलने में विश्वास करते हैं, लेकिन देश की सामाजिक और धार्मिक संरचना को संतुलित बनाए रखना भी सबकी जिम्मेदारी है।”
राजनीतिक मोर्चे पर भी उन्होंने महागठबंधन और खासकर तेजस्वी यादव पर निशाना साधा।
बिना नाम लिए चौबे ने कहा, “कुछ लोग मुंगेरीलाल के हसीन सपने देख रहे हैं, लेकिन 14 तारीख के बाद उनकी नींद खुल जाएगी। मुख्यमंत्री बनना तो दूर, वे कालकोठरी के मुख्य कैदी बनने की राह पर हैं।”
मिथिला क्षेत्र को लेकर चौबे ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि इस बार भाजपा की सरकार बनने पर उपमुख्यमंत्री मिथिला क्षेत्र से ही बनेगा।
उन्होंने कहा कि मिथिला की जनता भाजपा के साथ खड़ी है और इस बार यहां से ऐतिहासिक नतीजे सामने आएंगे।
दरभंगा में अश्विनी चौबे के इन बयानों के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
उनके जनसंख्या और मुस्लिम समुदाय पर दिए गए वक्तव्य को लेकर विपक्षी दलों ने नाराजगी जताई है, जबकि भाजपा कार्यकर्ता इसे स्पष्ट और साहसी बयान बता रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि भाजपा अब मिथिला को बिहार चुनाव की नई सियासी धुरी बनाने की तैयारी में जुट गई है।

