कीचड़ में हुआ प्रसव, 3 किलोमीटर दूर खड़ी रही एंबुलेंस! रीवा में बदहाल सड़क ने फिर बढ़ाई मुसीबत

रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से विकास के सरकारी दावों और जमीनी हकीकत को सामने लाने वाली एक बेहद झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। गुढ़ तहसील और रायपुर कर्चुलियान ब्लॉक के ग्राम रेरुआ खुर्द में सड़क की बदहाली ने एक गर्भवती महिला की मुश्किलें इतनी बढ़ा दीं कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसे कीचड़ भरे रास्ते में बच्चे को जन्म देना पड़ा। गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी और प्रसूता को ले जा रहा निजी वाहन भी कीचड़ में फंस गया। ऐसे में रास्ते में ही प्रसव कराना पड़ा। गनीमत रही कि मां और नवजात दोनों सुरक्षित हैं।

स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, रेरुआ खुर्द की सड़क पिछले करीब 5 वर्षों से जर्जर और बदहाल है। बारिश के मौसम में यही सड़क कीचड़ और पानी से लबालब हो जाती है। बीती रात गांव की एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो परिजनों ने तुरंत 108 एंबुलेंस को फोन किया। लेकिन सड़क पर फैले दलदल के कारण एंबुलेंस गांव से करीब 3 किलोमीटर पहले ही रुक गई और आगे जाने में असमर्थता जताई।

इसके बाद परिजनों ने एंबुलेंस तक पहुंचने के लिए आनन-फानन में निजी वाहन का सहारा लिया। लेकिन प्रसूता को लेकर जा रही गाड़ी भी कुछ दूर जाने के बाद कीचड़ में बुरी तरह फंस गई। महिला की प्रसव पीड़ा बढ़ती गई और स्थिति ऐसी हो गई कि परिजनों और ग्रामीणों को सड़क पर ही प्रसव कराना पड़ा। इसी कीचड़ भरे रास्ते में मासूम की किलकारी गूंजी। इस दौरान पूरे गांव में चिंता और खौफ का माहौल बना रहा, हालांकि राहत की बात यह रही कि मां और नवजात दोनों सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत सरपंच सुरेश साकेत को कई बार सड़क की बदहाल स्थिति के बारे में जानकारी दी गई, लेकिन समस्या को लगातार नजरअंदाज किया गया। अब ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक नागेंद्र सिंह और रीवा जिला प्रशासन से तत्काल सड़क का निरीक्षण कराने, बारिश के दौरान आवागमन बहाल करने और जल्द से जल्द पक्की सड़क का निर्माण कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का सवाल सीधा है कि अगर बदहाल सड़क की वजह से एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकती, तो आपात स्थिति में ग्रामीणों की जिंदगी और सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? यह घटना सिर्फ एक परिवार की परेशानी नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों में सड़क और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी स्थिति पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।

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