शहडोल। मध्य प्रदेश के ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र से सड़क की बदहाली की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है। आखेटपुर के डाला टोला में 70 वर्षीय श्यामकली पटेल का नागपुर में इलाज के दौरान निधन हो गया। परिजन उनका शव एंबुलेंस से गांव तक लेकर पहुंचे, लेकिन घर से महज एक किलोमीटर पहले कीचड़ भरे रास्ते ने एंबुलेंस के पहिए रोक दिए। हालात ऐसे थे कि चार पहिया वाहन आगे नहीं जा सका। आखिरकार परिजनों को शव को बैलगाड़ी में रखकर करीब एक किलोमीटर तक कीचड़ भरे रास्ते से घर ले जाना पड़ा।
दरअसल, ग्राम पंचायत आखेटपुर के वार्ड नंबर एक, डाला टोला निवासी श्यामकली पटेल का नागपुर में उपचार के दौरान निधन हुआ था। इसके बाद परिजन एंबुलेंस से उनका शव गांव लेकर पहुंचे। लेकिन घर से करीब एक किलोमीटर पहले बारिश के बाद सड़क की हालत इतनी खराब थी कि एंबुलेंस आगे नहीं बढ़ सकी। जगह-जगह कीचड़ और दलदल के कारण वाहन के पहिए फंसने लगे और रास्ता पार करना मुश्किल हो गया।
मजबूरी में परिजनों ने शव को एंबुलेंस से उतारा और बैलगाड़ी में रखकर करीब एक किलोमीटर का सफर तय किया। जिस शव को एंबुलेंस से गांव तक लाया गया था, उसे घर तक पहुंचाने के लिए बैलगाड़ी का सहारा लेना पड़ा। यह सिर्फ एक परिवार की मजबूरी नहीं, बल्कि डाला टोला की बदहाल सड़क व्यवस्था की एक तस्वीर बनकर सामने आई है।
जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र पटेल का कहना है कि डाला टोला तक सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार शासन और प्रशासन को अवगत कराया गया है। ग्रामीण भी लगातार सड़क की समस्या दूर करने की मांग करते रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका।
अब सवाल यही है कि जिस गांव में किसी जीवित व्यक्ति के लिए एंबुलेंस पहुंचने का रास्ता नहीं है और किसी मृतक की अंतिम यात्रा तक सड़क के अभाव में बैलगाड़ी से करनी पड़ती है, वहां विकास की योजनाओं का लाभ आखिर किस तक पहुंच रहा है? यह तस्वीर ग्रामीण इलाकों में सड़क व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की जमीनी हकीकत पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।

