आस्था, पर्यावरण और अनूठी भक्ति! 151 किलो पीतल के बर्तनों से साकार हुए ‘विघ्नहर्ता’, इंदौर में देखने उमड़े श्रद्धालु

 इंदौर। इंदौर में गणेश उत्सव के दौरान भक्ति और पर्यावरण संरक्षण का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। शहर के पश्चिमी क्षेत्र स्थित विकास नगर में बर्तनों से बनाई गई भगवान श्री गणेश की प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। सैकड़ों की संख्या में लोग इस अनूठी प्रतिमा के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं।

विकास नगर कॉलोनी में श्री सिद्धि विनायक भक्त मंडल के बैनर तले 10 दिवसीय गणेश उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन से जुड़े सुभाष चंद्र ताम्रकार के मुताबिक, वे पिछले करीब 30 सालों से गणेश चतुर्थी पर प्रतिमा स्थापित कर उत्सव मनाते आ रहे हैं।

इस बार उन्होंने 151 किलो पीतल के अलग-अलग बर्तनों को कलात्मक तरीके से जोड़कर भगवान गणेश की प्रतिमा तैयार की है। बर्तनों से बनी यह प्रतिमा देखने में बेहद आकर्षक है और लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

इस अनूठी प्रतिमा के पीछे एक भावनात्मक सोच भी जुड़ी हुई है। सुभाष चंद्र ताम्रकार बताते हैं कि वर्षों पहले जब वे प्लास्टर ऑफ पेरिस, लकड़ी और घास-फूस से बनी मूर्तियों के विसर्जन के लिए जाते थे, तो विसर्जन स्थलों पर मूर्तियों की दुर्दशा देखकर उन्हें काफी दुख होता था।

उनके मुताबिक, इससे जल और पर्यावरण पर भी असर पड़ता था और धार्मिक आस्था को भी ठेस पहुंचती थी। इसी अनुभव के बाद उनके मन में ऐसा विकल्प तैयार करने का विचार आया, जिससे भगवान गणेश की स्थापना भी हो और विसर्जन से होने वाले प्रदूषण से भी बचा जा सके।

इसी सोच के साथ उन्होंने बर्तनों से गणेश प्रतिमा बनाने का संकल्प लिया। मंडल की खास बात यह है कि हर साल अलग-अलग धातुओं और बर्तनों का इस्तेमाल करके गणेश प्रतिमा तैयार की जाती है। कभी पीतल, तो कभी तांबे, स्टील और दूसरी धातुओं के बर्तनों को कलात्मक रूप से जोड़कर भगवान गणेश का स्वरूप तैयार किया जाता है।

गणेश उत्सव समाप्त होने के बाद इन बर्तनों का दोबारा उपयोग किया जा सकता है। यानी प्रतिमा के लिए इस्तेमाल सामग्री नष्ट नहीं होती और विसर्जन के कारण होने वाले प्रदूषण से भी बचाव होता है।

विकास नगर में 10 दिनों तक चलने वाले इस गणेश उत्सव के दौरान सुबह और शाम विधि-विधान से पूजा और आरती की जा रही है। भगवान गणेश को अलग-अलग व्यंजनों का भोग लगाया जा रहा है और श्रद्धालु बड़ी संख्या में धार्मिक आयोजनों में शामिल हो रहे हैं।

आयोजन में किशन ताम्रकार, अंकुश चंद्रवंशी, पवन भोगलिया, नीरज सिकरवार और युवराज ताम्रकार सहित कई श्रद्धालु सहयोग कर रहे हैं। मंडल की ओर से धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।

इंदौर की यह अनूठी गणेश प्रतिमा सिर्फ आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही है। भगवान गणेश की भक्ति के साथ प्रकृति की चिंता और विसर्जन के दौरान होने वाले प्रदूषण से बचने की यह पहल लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *