मध्य प्रदेश के खंडवा में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां हापला गांव के किसान अखिलेश सोलंकी ने खेत में पेड़ से फंदा लगाकर जान दे दी। पूरे गांव और परिवार में मातम का माहौल है। परिजनों का कहना है कि अखिलेश बीते दो-तीन सालों से बढ़ते कर्ज और लगातार खराब हो रही फसलों से बेहद परेशान था। उसके ऊपर सोसायटी और बैंक का लगभग 3 लाख रुपये का कर्ज था, साथ ही साहूकारों का भी अलग से उधार था। सोयाबीन की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी थी और मक्का व अरवी के दाम न मिलने से हालत और बिगड़ती चली गई। परिवार के पास कुल आठ एकड़ जमीन है, लेकिन नुकसान दर नुकसान ने अखिलेश को आर्थिक तंगी के गहरे अंधेरे में धकेल दिया।
परिजन साफ कहते हैं कि अखिलेश दबाव में था, परेशान था, और आखिरकार उसी तनाव में उसने यह बड़ा कदम उठा लिया। वहीं गांव के सरपंच का भी कहना है कि क्षेत्र के कई किसान फसलों के गिरते दाम और लगातार नुकसान से जूझ रहे हैं।
लेकिन प्रशासन की बात कुछ और कह रही है। खंडवा के अपर कलेक्टर के आर बड़ोले का कहना है कि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि अखिलेश को कर्ज को लेकर न तो कोई तंग कर रहा था और न ही कोई नोटिस भेजा गया था। उनका कहना है कि प्राथमिक रूप से मामला पारिवारिक कलह का लग रहा है, क्योंकि अखिलेश और उसकी पत्नी के बीच विवाद की जानकारी मिली है। इसके बावजूद, परिजन अपनी बात पर कायम हैं कि कर्ज और फसल की बर्बादी ने ही अखिलेश को तोड़ दिया।
फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और पूरे मामले की जांच जारी है। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर कब तक किसान कर्ज, नुकसान और तनहा संघर्ष के बीच यूं ही टूटते रहेंगे…

