पटना। नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर अपने पुराने कार्यशैली में लौट आए हैं। कभी विकास कार्यों का निरीक्षण, तो कभी विभागों की समीक्षा—ठीक उसी अंदाज में उन्होंने अब कैबिनेट सेक्रेटेरिएट डिपार्टमेंट और मॉनिटरिंग डिपार्टमेंट की अहम रिव्यू मीटिंग ली है। प्रशासनिक तैयारियों और योजनाओं की प्रगति को लेकर सीएम ने कई जरूरी निर्देश दिए, जिससे साफ दिख रहा है कि सरकार अब पूरे एक्शन मोड में है।
इसी बीच Bihar में सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाला मुद्दा—विधानसभा अध्यक्ष कौन बनेगा—अब लगभग साफ होने लगा है। कई दिनों से चल रही अनिश्चितता के बीच अब तस्वीर धीरे-धीरे खुलकर सामने आ रही है। राजनीति के गलियारों में फुसफुसाहट थी, लेकिन अब माहौल बता रहा है कि निर्णय बस औपचारिकता भर रह गया है। अंत में जो नाम आगे बढ़कर आया है वह अपने शांत स्वभाव, वर्षों के अनुभव और सदन की कार्यशैली पर मजबूत पकड़ के लिए जाना जाता है।
सूत्रों के मुताबिक एनडीए के शीर्ष नेतृत्व से लेकर सहयोगी दलों तक एक बात पर सहमति बन चुकी है कि इस बार सदन की कमान किसी अनुभवी और परिपक्व नेता को सौंपनी चाहिए। आने वाले महीनों में सरकार कई अहम विधायी प्रस्ताव सदन में लाने वाली है, ऐसे में ऐसा चेहरा चाहिए जो टकराव कम और संवाद ज्यादा बना सके। इसी सोच के चलते दावेदारों की लंबी सूची में बीजेपी के वरिष्ठ नेता और कई बार के विधायक प्रेम कुमार का नाम सबसे आगे निकल गया है। उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और सख्त लेकिन संतुलित कार्यशैली को देखते हुए माना जा रहा है कि वह 18वीं विधानसभा को स्थिरता और अनुशासन के साथ दिशा देने में सक्षम हैं।
अब पूरा माहौल एक तारीख पर टिक गया है—1 दिसंबर। शीतकालीन सत्र के पहले दिन नए विधायकों का शपथग्रहण होगा और इसी दौरान विधानसभा अध्यक्ष पद का चुनाव भी होना है। चूंकि सत्तापक्ष एकमत है, इसलिए चुनाव लगभग औपचारिकता जैसा माना जा रहा है। विपक्ष भी अभी किसी आक्रामक रणनीति के मूड में नहीं दिख रहा, जिससे राजनीतिक माहौल शांत बना हुआ है। लंबे समय बाद बिहार की राजनीति में किसी बड़े पद को लेकर इतनी स्पष्टता दिखाई दे रही है, और अब सबकी निगाहें बस 1 दिसंबर पर टिकी हैं, जब सदन अपने नए नेतृत्व का स्वागत करेगा।

