रायसेन। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में अन्नदाता किसान एक बार फिर परेशानी में हैं। धान की बंपर आवक ने कृषि उपज मंडी की पूरी क्षमता को ठप कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि मंडी में जगह नहीं बची, इसलिए धान की नीलामी अब दशहरा मैदान पर हो रही है, जहां किसान अपनी बारी के इंतज़ार में 2 से 3 नहीं बल्कि पूरे 3 से 4 दिन तक खुले आसमान के नीचे ठंड में बैठे रहने को मजबूर हैं। रायसेन ही नहीं बल्कि भोपाल, विदिशा, अशोकनगर और आसपास के जिलों के किसान भी धान बेचने यहां पहुंच रहे हैं। रोजाना एक हजार से ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रॉलियां धान लेकर मंडी पहुंचती हैं, लेकिन जगह की कमी के कारण नीलामी केवल दशहरा मैदान में संभव हो पा रही है। यहां दिनभर में चार से पांच सौ ट्रॉलियों की ही नीलामी हो पाती है, बाकी को अगले दिन तक इंतज़ार करना पड़ता है।
बुरी बात यह है कि मैदान में किसानों की सुरक्षा, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी कोई इंतज़ाम नहीं है। किसान अपनी ट्रॉलियां खड़ी करने के लिए जद्दोजहद करते रहते हैं, और कई बार इसी को लेकर विवाद और मारपीट तक हो जाती है। यहां तक कि कुछ लोग रस्सियों से जगह रोककर रख लेते हैं और बाहरी किसानों से 200 से 500 रुपये तक की अवैध वसूली भी की जा रही है। किसानों का कहना है कि नीलामी सुबह 11 बजे शुरू होती है, फिर दो घंटे बाद भोजन अवकाश और उसके बाद दोपहर में दोबारा नीलामी होती है। नगद भुगतान के लालच में किसान यहां आते हैं, लेकिन उन्हें धान का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा और कई किसानों की तो लागत भी नहीं निकल रही है।

