धार। धार की ऐतिहासिक भोजशाला में मंगलवार को उस समय माहौल गरम हो गया जब साप्ताहिक सत्याग्रह के लिए पहुंचे श्रद्धालु मां सरस्वती का नया तेल चित्र लेकर गर्भगृह में प्रवेश करना चाहते थे, लेकिन ASI के सुरक्षा कर्मियों ने चित्र को अंदर ले जाने से रोक दिया और उसे अपने कब्जे में ले लिया। बाद में वह चित्र पुलिस को सौंप दिया गया। यह देखते ही वहां मौजूद सैकड़ों श्रद्धालुओं में नाराज़गी फैल गई और बिना चित्र के ही पूजा-अर्चना, हनुमान चालीसा और हवन किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं और हिंदू संगठनों ने ASI के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
भोज उत्सव समिति के सदस्य तुरंत CSP सुजावल जाग्गा और कोतवाली TI दीपक सिंह चौहान से चर्चा करने पहुंचे और भोजशाला के अंदर चल रहे रंगाई-पुताई और कथित अतिक्रमण को लेकर भी आपत्ति जताई। समिति के अध्यक्ष सुरेश जलोदिया और महामंत्री सुमित चौधरी ने कहा कि गर्भगृह में रखा पुराना चित्र बेहद जीर्ण हो चुका था, इसलिए नया तेल चित्र बनवाया गया था, लेकिन ASI की मनाही ने भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। उनका कहना था कि एक तरफ पूजा की अनुमति दी जाती है, और दूसरी तरफ मां वाग्देवी का चित्र अंदर ले जाने नहीं दिया जाता — यह दोहरा रवैया अब बर्दाश्त के बाहर है।
घटना के बाद जब ASI के स्थानीय अधिकारी प्रशांत पाटनकर से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनका फोन लगातार नॉट रीचेबल बताया गया। ज्ञात हो कि भोजशाला विवाद इस समय इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर ASI द्वारा किए जा रहे वैज्ञानिक सर्वेक्षण के चलते और भी सुर्खियों में है। कोर्ट के आदेश के अनुसार मंगलवार को हिंदू समुदाय को पूजा-अर्चना की अनुमति है, जबकि शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष नमाज़ अदा करता है।

