राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर कार्यशाला: केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने बताईं बड़ी चुनौतियां, CM डॉ. मोहन बोले—शिक्षा के नए अध्याय की ओर बढ़ रहा है मध्यप्रदेश

भोपाल। मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें नीति के क्रियान्वयन, उससे जुड़ी चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह मौजूद रहे।

कार्यशाला में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री की मंशा के अनुसार नई शिक्षा नीति तैयार की गई है, लेकिन अभी भी शिक्षा प्रणाली में काफी सुधार की जरूरत है। जो बच्चे देर से शिक्षा लेने आते हैं, उनके लिए विशेष एडिशन की सुविधा दी जा रही है, टॉपर बच्चों को लैपटॉप दिए जा रहे हैं और साइकिल के माध्यम से बच्चों को स्कूल पहुंचाने की व्यवस्था भी की जा रही है। मध्यप्रदेश देश का दूसरा राज्य है जो दोबारा परीक्षा दिलाने की व्यवस्था कर रहा है, साथ ही लोकल विषयों को भी पाठ्यक्रम में जोड़ा जा रहा है।

उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि राष्ट्रीय मिशन के तहत अब तक 56 प्रशिक्षण कार्यक्रम किए जा चुके हैं और 13 भाषाओं को महाविद्यालयों में जोड़ने का काम किया गया है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संबोधन में कहा कि मध्यप्रदेश वह भूमि है जहां सनातन ज्ञान परंपरा सदियों से सुरक्षित रही है। उन्होंने बताया कि देश में 30 करोड़ और एमपी में 1 करोड़ 35 लाख विद्यार्थी हैं, जो दिखाता है कि प्रदेश युवाओं का केंद्र है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि 40% बच्चे अभी भी शिक्षा में पीछे हैं। स्कूलों में बच्चे गलत उत्तर देने के डर से चुप रहते हैं—इस मनोस्थिति को बदलना होगा।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में AI एक बड़ा टूल बनने जा रहा है और एमपी को 8 लाख शिक्षकों को AI से जोड़ने की चुनौती स्वीकार करनी होगी। साथ ही सुझाव दिया कि पहली कक्षा से लेकर 12वीं तक बच्चे लगातार पढ़ें—इसे एक जनआंदोलन की तरह चलाना होगा ताकि बच्चा बीच में पढ़ाई न छोड़े।

उन्होंने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया कि कार्यक्रमों में गुलदस्ते की जगह स्कूलों में फलों की टोकरी दी जाए। उन्होंने कहा कि कई बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने परिस्थितियों के कारण कभी फल नहीं देखे। न्यूट्रीशन मिलेगा तो शायद उनमें से अगला अब्दुल कलाम निकल सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्कूल और उच्च शिक्षा दोनों में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। प्रदेश में संदीपनि विद्यालय विश्व स्तर पर चयनित किए गए हैं और 370 विद्यालय तैयार हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश नया अध्याय लिख रहा है—एक ऐसा अध्याय जो सभी वर्गों के छात्रों के भविष्य को बेहतर दिशा देगा।

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