दीक्षांरभ 2025: देश के आयुर्वेद महाविद्यालयों में मानसरोवर एक ब्रांड, ज्ञान, नवाचार और संस्कृति का पर्याय मानसरोवर

भोपाल: मानसरोवर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के तीन आयुर्वेद महाविद्यालय – मानसरोवर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर, श्री सांई इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदिक रिसर्च एंड मेडिसिन, फैकल्टी ऑफ आयुर्वेदा मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी में जारी दीक्षांरभ ट्रांजिशनल करिकुलम प्रोग्राम बैच 2025-26 का औपचारिक शुभारंभ मानसरोवर प्रांगण, हिनाौतिया आलम में सोमवार को किया गया। इस दौरान नवप्रवेशित भावी वैद्यों ने चरक शपथ ग्रहण करते हुए सेवा, नैतिकता और करुणा को चिकित्सा का आधार मानने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि ओजस फाउंडेशन के वरिष्ठ वैद्य मधुसूदन देशपांडेय, विशिष्ट अतिथि आरोग्य भारती के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य श्री मिहिर कुमार जी सहित मानसरोवर समूह के आयुर्वेद संचालक डॉ. बाबुल ताम्रकार, मानसरोवर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के प्राचार्य डॉ. अनुराग सिंह राजपूत, श्री सांई इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदिक रिसर्च एंड मेडिसिन की प्राचार्या डॉ. मनीषा राठी और फैकल्टी ऑफ आयुर्वेदा के प्राचार्य डॉ. श्रीकांत पटेल ने दीप प्रज्वलित कर किया।

मानसरोवर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के चीफ एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर इंजी. गौरव तिवारी ने सभी अतिथियों सहित नवप्रवेशित विद्यार्थियों का मानसरोवर प्रांगण में स्वागत करते हुए कहा कि एक चिकित्सक की सफलता का पैमाना लाखों जिंदगियों से जुड़ा होता है। आने वाले चार साल आपके भविष्य निर्माण के हैं, अच्छे शिष्य बनें, गुरु के निर्देश का पालन करें और अपना ध्यान अच्छे चिकित्सक बनने पर केंद्रित रखें।

मुख्य अतिथि वैद्य मधुसूदन देशपाण्डेय ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में मानसरोवर पूरे देश में एक ब्रांड है जहाँ विद्यार्थियों को केवल शिक्षा नहीं बल्कि संस्कार भी मिलते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों के मन में उठने वाले प्रश्नों के माध्यम से आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को विस्तार से समझाया। इसी क्रम में मोटिवेशन स्पीच देते हुए श्री मिहिर कुमार जी ने कहा कि आयुर्वेद की पद्धति नित्य नूतन चिर पुरातन है जो अपने भीतर विज्ञान के साथ एक कला को भी समाहित किए है। उन्होंने आयुर्वेद के स्वर्णिम काल का जिक्र करते हुए कहा कि ये समय आयुर्वेद का है क्योंकि आज विश्व पटल पर आयुर्वेद चिकित्सकों की मांग बढ़ी है।

इससे पहले हुए सत्र में डॉ. मदन मोहन सिंह कुशवाहा, डॉ. अरुणथिया मित्रा और डॉ. श्रुति अरजरिया ने कैंपस ओरिएंटेशन विषय पर वक्तव्य दिया। अंत में सभी का आभार श्री सांई इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदिक रिसर्च एंड मेडिसिन की प्राचार्या डॉ. मनीषा राठी ने व्यक्त किया। इस अवसर सभी महाविद्यालयों के शिक्षक शिक्षिकाएं और तीनों महाविद्यालयों के नवप्रवेशित विद्यार्थीगण मौजूद रहे।

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