संभल को ‘संभाल’, तस्वीर बदल रही योगी सरकार, संभल में फरियादियों के लिए कारगर साबित हो रही ‘भरोसे की पर्ची’

संभल… एक ऐसा जिला, जो कभी दंगों, तनाव और उपेक्षा की मार झेल रहा था। लेकिन आज तस्वीर बदल रही है। योगी आदित्यनाथ की सरकार संभल को ‘संभाल’ रही है और यही वजह है कि यह प्राचीन, सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से समृद्ध धरती अब अपने गौरवशाली अतीत को फिर से जी रही है और खुशहाल भविष्य की ओर तेजी से बढ़ रही है। एक तरफ पुलिस सार्वजनिक संवाद के जरिए शांति और सौहार्द बनाए हुए है, तो दूसरी तरफ पर्यटन, संस्कृति, शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर को नई पहचान मिल रही है। सरकार संभल के विकास के पाँच बड़े आयामों पर काम कर रही है और परिणाम साफ दिखाई दे रहे हैं—अब संभल में पलायन नहीं होता, क्योंकि कानून का राज स्थापित हो चुका है।

योगी सरकार संभल की ऐतिहासिक धरोहरों को फिर से जीवित कर रही है। कभी कूड़े के ढेर में तब्दील हो चुका और कब्जों में जकड़ा ब्रह्मकूप आज फिर से संजीवित किया जा चुका है। संभल में कुल 68 तीर्थ और 19 कूप हैं और पहले चरण में इन प्राचीन स्थलों के पुनरुद्धार पर तेजी से काम चल रहा है। दूसरे चरण में म्यूजियम और लाइट एंड साउंड शो जैसी आधुनिक सुविधाओं पर फोकस किया जा रहा है। 12 प्रमुख तीर्थों के विकास के लिए भूमि खरीदी की प्रक्रिया जारी है और इसके लिए करोड़ों रुपये की धनराशि मांगी गई है।

इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करें तो संभल में विकास का नया दौर शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर यहां एकीकृत कलेक्ट्रेट भवन, जिला न्यायालय, जिला कारागार और 24वीं वाहिनी पीएसी की स्थापना हो रही है। टू लेन, फोर लेन, जल निकास, नगर विकास और नमामि गंगे योजना जैसे कई प्रोजेक्ट संभल को नए आयाम दे रहे हैं। इतना ही नहीं, 11 हेक्टेयर से अधिक सरकारी भूमि पर CBG प्लांट स्थापित करने की तैयारी भी चल रही है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी संभल नई मिसाल बन रहा है। यहां संचालित 16 पीएमश्री विद्यालय अब निजी स्कूलों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। आधुनिक लैब, एजुकेशन पार्क, औषधीय वाटिका, भोजनालय और हरिश्चंद्र सभागार जैसे मॉडल सुविधाएँ इन स्कूलों को खास बनाती हैं। दिव्यांग छात्रों के लिए की गई व्यवस्थाओं पर खुद मुख्यमंत्री योगी ने जिलाधिकारी राजेंद्र पैंसिया को सम्मानित किया है।

पर्यटन के क्षेत्र में भी संभल तेजी से आगे बढ़ रहा है। अयोध्या की तर्ज पर 24 कोसी परिक्रमा मार्ग बनाने की तैयारी चल रही है, जिससे श्रद्धालु 68 तीर्थ स्थलों का दर्शन कर सकेंगे। परिक्रमा मार्ग से जुड़े अवरोध और अवैध कब्जे हटाए जा रहे हैं। हर साल पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं को आकर्षित करने वाला सिसोना डांडा मेला भी अब प्रांतीय मेला बनने की ओर है। महिष्मती नदी के पुनरुद्धार और दतावली गांव में पर्यटन सुविधाओं के विकास पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। कल्कि तीर्थ विकास परिषद के गठन पर भी तेजी से काम आगे बढ़ रहा है।

संभलवासी खुद भी इस विकास यात्रा का हिस्सा बन चुके हैं। जिन परिवारों ने हालात खराब होने के कारण जिले से पलायन किया था, वे अब वापस लौट रहे हैं। प्रशासन ने 15 से ज्यादा परिवारों की संपत्तियाँ बहाल करवा दी हैं। संवेदनशील इलाकों में 39 नई चौकियां, 1300 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे और चौकन्नी पुलिस व्यवस्था अब सुरक्षा का मजबूत एहसास दिलाती है।

आर्थिक रूप से भी संभल का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है। साल 2024-25 में संभल ने 2405 करोड़ रुपये का निर्यात किया और पूरे प्रदेश में दसवें स्थान पर पहुंच गया। यह साबित करता है कि संभल न सिर्फ सांस्कृतिक, बल्कि आर्थिक रूप से भी मजबूत हो रहा है।

विकास में नवाचार भी हो रहे हैं। पुलिस अधीक्षक केके विश्नोई की ‘भरोसे की पर्ची’ योजना ने फरियादियों के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई है। शिकायत दर्ज होते ही उन्हें एक डिजिटल नंबर दिया जाता है और समयसीमा में कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। जिलाधिकारी द्वारा शुरू किया गया ‘एक पुस्तक–एक पुष्प’ अभियान शिक्षा और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक अनूठा प्रयास है। अब तक 16 हजार से अधिक पुस्तकें लोगों को दी जा चुकी हैं। संभल संवाद ऐप ने नागरिक सेवाओं को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आसान और पारदर्शी बना दिया है।

संभल आज बदल रहा है… अपनी विरासत को संवारते हुए, आधुनिकता की ओर बढ़ते हुए और जनता को विकास की प्रक्रिया से जोड़ते हुए। यह वही संभल है, लेकिन तस्वीर नई है… और भविष्य उम्मीदों से भरा हुआ।

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