जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील को जिला बनाने की मांग एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब 25 सालों से चल रहे इस संघर्ष पर अब क्या विराम लगेगा या आंदोलन और तेज होगा, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। सिहोरा को जिला बनाए जाने की मांग को लेकर आंदोलनकारी अड़े हुए हैं और इसी मुद्दे पर कल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ आंदोलनकारियों की अहम टेबल टॉक होने जा रही है।
इस मांग को लेकर सिहोरा में सैकड़ों आंदोलनकारी आमरण सत्याग्रह पर बैठे हैं। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रचारक ने भी अन्न ग्रहण त्याग दिया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि वर्षों से केवल आश्वासन मिलते रहे हैं, लेकिन जमीन पर अब तक कोई ठोस फैसला नहीं हुआ।
सिहोरा को जिला बनाने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी जैसे बड़े नेताओं द्वारा भी अलग-अलग समय पर आश्वासन दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद आज तक मांग पूरी न होने से स्थानीय लोगों में गहरा रोष है।
आंदोलनकारियों की मांग है कि सिहोरा जिले में मझौली, बहोरीबंद और गोसलपुर को शामिल किया जाए। इस मुद्दे को लेकर अब तक भू-समाधि, सिहोरा बंद, भूख हड़ताल, कैंडल मार्च और खून के दीए जलाकर विरोध जैसे कई बड़े आंदोलन किए जा चुके हैं। सैकड़ों ज्ञापन प्रशासन और सरकार को सौंपे जा चुके हैं, लेकिन समाधान अब भी दूर नजर आ रहा है।
आंदोलनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर मुख्यमंत्री के साथ होने वाली टेबल टॉक में कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। अब सभी की निगाहें इस बैठक पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि सिहोरा का 25 साल पुराना इंतजार खत्म होगा या संघर्ष का रास्ता और लंबा हो जाएगा।

