मध्यप्रदेश के दमोह जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश को हिला दिया है। यहां सतरिया गांव में पंचायत के आदेश पर एक युवक से पैर धुलवाकर वही पानी पिलाया गया। जैसे ही इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, लोगों में आक्रोश फैल गया और मामला तूल पकड़ गया। प्रशासन तुरंत हरकत में आया और पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि बाकी की तलाश जारी है।
दरअसल, विवाद की शुरुआत तब हुई जब गांव के युवक पुरुषोत्तम कुशवाहा ने एक शराब बेचने वाले अनुज उर्फ अन्नू पांडे का एआई से एडिट किया गया वीडियो सोशल मीडिया पर डाला। वीडियो में अन्नू को जूते की माला पहने दिखाया गया था। ये वीडियो वायरल होते ही गांव में तनाव फैल गया। युवक ने पोस्ट डिलीट कर माफी भी मांगी, लेकिन मामला शांत नहीं हुआ। इसके बाद शुक्रवार को गांव में पंचायत बुलाई गई और पंचायत ने युवक को सजा सुनाई — अन्नू के पैर धोकर वही पानी पीने की।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पंचायत के सामने युवक ने अन्नू के पैर धोए और फिर मजबूरी में वही पानी पी लिया। अगले ही दिन वीडियो वायरल हुआ, जिससे पूरे क्षेत्र में बवाल मच गया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया और अब दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
घटना के बाद अन्नू पांडे ने एक वीडियो जारी कर सफाई दी कि मामला उतना गंभीर नहीं है जितना दिखाया जा रहा है। उन्होंने कहा — “हमारा गुरु-शिष्य का रिश्ता है, उसने अपनी इच्छा से मेरे पैर धोए थे। अगर किसी समाज को इससे ठेस पहुंची है, तो मैं क्षमा चाहता हूं।”
वहीं, पीड़ित युवक ने भी सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि यह मामला अब राजनीतिक रंग ले रहा है। उसने बताया कि जिनके पैर उसने धोए, वे उसके पारिवारिक गुरु हैं और उसने यह सब स्वेच्छा से किया। युवक ने प्रशासन से भी अपील की कि किसी पर कार्रवाई न की जाए।
दूसरी ओर, कुशवाहा समाज के सैकड़ों लोग रविवार को एसपी कार्यालय पहुंचे और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि इस घटना ने पूरे समाज का अपमान किया है।
रविवार रात कलेक्टर सुधीर कोचर और एसपी श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर जानकारी दी कि पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और बाकी की तलाश जारी है। प्रशासन ने आश्वासन दिया कि गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और कुरीतियों को खत्म करने के लिए लोगों के बीच जाकर बातचीत की जा रही है।
दमोह का यह मामला अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है, और लोग सवाल उठा रहे हैं — आखिर 21वीं सदी में भी इंसान को इस तरह की अपमानजनक सजा देना कहां तक सही है?

