भोपाल। मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों ने देश के सबसे स्वच्छ शहर की छवि को गहरी चोट पहुंचाई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की है, लेकिन इस फैसले पर सियासत तेज हो गई है। विपक्ष के साथ अब पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी सरकार के फैसले पर भड़क गई हैं और उन्होंने साफ कहा है कि जिंदगी की कीमत दो लाख रुपए नहीं होती।
उमा भारती ने कहा कि साल 2025 के अंत में इंदौर जैसे स्वच्छता पुरस्कार प्राप्त शहर में गंदा और जहरीला पानी पीने से हुई मौतों ने पूरे प्रदेश, सरकार और व्यवस्था को कलंकित कर दिया है। जिस शहर को देशभर में स्वच्छता का प्रतीक माना जाता है, वहां ऐसी बदसूरत हकीकत सामने आना बेहद शर्मनाक है। गंदगी और जहर मिला पानी कई जिंदगियों को निगल गया है और मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी की जान जाने के बाद उसके परिवार को दो लाख रुपए देकर जिम्मेदारी से नहीं बचा जा सकता। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, वे जीवन भर उस दर्द को ढोते रहेंगे। इस पाप का घोर प्रायश्चित होना चाहिए, पीड़ित परिवारों से माफी मांगी जानी चाहिए और नीचे से लेकर ऊपर तक जो भी दोषी हैं, उन्हें अधिकतम सजा मिलनी चाहिए।
उमा भारती ने साफ शब्दों में कहा कि यह मुख्यमंत्री मोहन यादव की अग्निपरीक्षा की घड़ी है, जहां सिर्फ मुआवजे से नहीं बल्कि कठोर कार्रवाई और जवाबदेही तय करके ही जनता का भरोसा वापस पाया जा सकता है।

