ग्वालियर। डॉ. भीमराव अंबेडकर के पोस्टर जलाने के मामले में आज हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में विशेष सुनवाई की गई, जहां रविवार के दिन स्पेशल बेंच बैठी, लेकिन इस दौरान वकील अनिल मिश्रा को कोई राहत नहीं मिल सकी।
जमानत खारिज होने के बाद हाईकोर्ट में अपील
मजिस्ट्रेट कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद अनिल मिश्रा की ओर से हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी, जिसके लिए मुख्य न्यायाधीश की अनुमति के बाद रविवार को स्पेशल बेंच का गठन किया गया।
प्रक्रियात्मक खामी पर हाईकोर्ट का निर्देश
सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि दलित उत्पीड़न यानी एट्रोसिटी एक्ट की धारा 1(13) के तहत फरियादी पक्ष को याचिका की कॉपी देना अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई थी।
24 घंटे में फरियादी को कॉपी देने के आदेश
इसी को देखते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि 24 घंटे के भीतर फरियादी मकरंद बौद्ध या उनके परिवार के किसी वयस्क सदस्य को पिटीशन की कॉपी उपलब्ध कराई जाए।
अब सोमवार को होगी अगली सुनवाई
कोर्ट के निर्देश के बाद इस मामले में अगली सुनवाई सोमवार को की जाएगी, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पर फैसला लिया जाएगा।
पुलिस पर संरक्षण देने के आरोप
वहीं अनिल मिश्रा के वकील पवन पाठक ने आरोप लगाया कि फरियादी मकरंद बौद्ध खुद एक मामले में फरार है, इसके बावजूद वह एसपी कार्यालय में प्रदर्शन करता है और अनिल मिश्रा व उनके साथियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराता है।
प्रशासन पर उठे सवाल
पवन पाठक ने पुलिस प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे लोगों को संरक्षण दिया जा रहा है, जबकि कानून का पालन समान रूप से नहीं हो रहा।

