भोपाल। मध्यप्रदेश में अब दवाओं की गुणवत्ता को लेकर कोई समझौता नहीं होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वास्थ्य विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं कि अब से हर दवा की संपूर्ण जांच की जाएगी। पहले जहां केवल रैंडम जांच होती थी, अब हर दवा के हर बैच की टेस्टिंग जरूरी होगी। गुणवत्ता प्रमाणित होने के बाद ही दवाएं अस्पतालों और मरीजों तक पहुंच पाएंगी।
मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि जनता के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी सख्ती के तहत, पिछले तीन सालों में 44 दवाओं पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है जो अमानक पाई गई थीं।
इसी बीच, मध्यप्रदेश सरकार की मुहिम के चलते जहरीला सीरप बनाने वाली श्री सन फार्मास्यूटिकल कंपनी पर बड़ी कार्रवाई की गई है। इस कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है और फैक्ट्री बंद करने के आदेश जारी हो चुके हैं।
एमपी पुलिस की एसआईटी टीम ने 9 अक्टूबर को कंपनी के मालिक रंगनाथन को तमिलनाडु के कांचीपुरम से गिरफ्तार किया। जांच में पाया गया कि कंपनी मानकों की अनदेखी कर खतरनाक दवाएं बना रही थी, जो मरीजों की जान के लिए खतरा बन सकती थीं।
सरकार का कहना है कि अब राज्य में केवल वही दवाएं चलेंगी जो पूरी तरह सुरक्षित और प्रमाणित होंगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव की इस पहल को स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जो दवा माफियाओं पर नकेल कसने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

