ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर हाईकोर्ट में 57 दिन से लापता नाबालिग बच्ची के मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस के रवैये पर कड़ी नाराजगी देखने को मिली। कोर्ट में खराब बर्ताव के चलते एक सब इंस्पेक्टर और एक प्रधान आरक्षक को निलंबित कर दिया गया है। हाईकोर्ट के निर्देश पर SSP ने यह कार्रवाई की और अदालत में माफी भी मांगी।
दरअसल, 57 दिनों से लापता बच्ची के पिता ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी, जिस पर मंगलवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान जब हाईकोर्ट ने नेम प्लेट को लेकर सवाल किया तो SI देशराज सिंह ने जैकेट की चेन खोलकर जवाब दिया। वहीं प्रधान आरक्षक श्रीराम शर्मा से जब रोजनामचा मांगा गया तो वे मोबाइल निकालने लगे। दोनों के इस रवैये को कोर्ट ने गंभीरता से लिया और महज 30 मिनट में SSP धर्मवीर शर्मा को तलब कर लिया।
SSP धर्मवीर शर्मा 15 मिनट के भीतर हाईकोर्ट में पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि दोनों अधिकारियों के मिसकंडक्ट की विभागीय जांच की जा रही है और बच्ची को जल्द खोजने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन जब कोर्ट ने जांच में हो रही लापरवाही पर नाराजगी जताई और SSP ने प्रधान आरक्षक की तारीफ की, तो हाईकोर्ट ने उन्हीं के सामने जांच की कमियां उजागर कर दीं। इसके बाद SSP को कोर्ट में माफी मांगनी पड़ी।
सुनवाई के दौरान जब SSP ने नाबालिगों की तलाश से जुड़े आंकड़े पेश किए तो कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि अपनी पीठ खुद ही मत थपथपाइए। आपको बता दें कि बच्ची 11 नवंबर से लापता है और 24 नवंबर को परिजनों ने पुरानी छावनी थाने में FIR दर्ज कराई थी। पुलिस द्वारा बच्ची को बरामद न कर पाने के बाद परिजनों ने मुकेश धानुक नाम के व्यक्ति के खिलाफ हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी।
इस पूरे मामले में हाईकोर्ट की सख्ती ने साफ संदेश दे दिया है कि नाबालिगों की सुरक्षा और मामलों की जांच में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

