अंधेरे को मात देकर दुनिया जीती: गांव की दुर्गा येवले ने वर्ल्ड कप में लहराया तिरंगा, इंदौर आवासीय विद्यालय में दिव्यांग खिलाड़ी का हुआ सम्मान

इंदौर। जहां हालात अक्सर लोगों से सपने छीन लेते हैं, वहीं बैतूल जिले के छोटे से गांव राखी की रहने वाली दुर्गा येवले ने उन्हीं हालात को चुनौती बनाकर दुनिया जीत ली। ब्लाइंड वुमेंस टी-20 वर्ल्ड कप 2025 जीतने वाली दुर्गा येवले आज पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। आंखों की कमजोरी को उन्होंने कभी अपनी पहचान पर हावी नहीं होने दिया और मेहनत के दम पर भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन किया।

कम उम्र में दुर्गा की नजर कमजोर होने लगी, दूर का देखना मुश्किल हो गया और पढ़ाई पर असर पड़ने लगा। डॉक्टरों की सलाह पर सामान्य स्कूल की जगह ब्लाइंड हॉस्टल का रास्ता चुना गया। परिवार के लिए यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन बेटी के सपनों को बचाने के लिए यही जरूरी था। घर से दूर रहकर पढ़ाई करना और नई परिस्थितियों से जूझना दुर्गा के लिए रोज की चुनौती थी, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। 10वीं तक की पढ़ाई बालिका छात्रावास में पूरी करने के बाद दुर्गा इंदौर पहुंचीं, जहां महेश दृष्टिहीन कल्याण संघ में 11वीं से लेकर ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई पूरी की।

यहीं दुर्गा को न सिर्फ शिक्षा मिली, बल्कि अपनी असली ताकत पहचानने का मौका भी मिला। पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेट उनका जुनून बन गया। साल 2022 में दिव्यांग क्रिकेट कैंप ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। इसके बाद फिटनेस, तकनीक और अभ्यास पर लगातार मेहनत शुरू हुई। मेहनत रंग लाई और पहले जिला स्तर, फिर इंदौर टीम में उनका चयन हुआ। विकेटकीपिंग और बल्लेबाजी में शानदार प्रदर्शन के चलते 2023 में उन्होंने मध्यप्रदेश टीम के साथ नेशनल स्तर पर कदम रखा।

इसके बाद 2024 और 2025 में दुर्गा ने लगातार नेशनल टूर्नामेंट खेले। केरल में हुए मुकाबलों में मध्यप्रदेश टीम ने 19 राज्यों को पछाड़कर चैंपियन का खिताब जीता, जिसमें दुर्गा की भूमिका निर्णायक रही। लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर उन्हें इंडियन ब्लाइंड वुमेंस क्रिकेट टीम में जगह मिली। वर्ल्ड कप 2025 में भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को हराया और फाइनल में नेपाल को मात देकर ट्रॉफी अपने नाम की। दुर्गा इस ऐतिहासिक जीत का हिस्सा बनीं।

इस बड़ी उपलब्धि के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुर्गा येवले को सम्मानित किया। इंदौर के महेश दृष्टिहीन कल्याण संघ पहुंचने पर भी उनका भव्य स्वागत किया गया। यहां दुर्गा ने बताया कि मैदान की सुविधा न होने के कारण उन्होंने टाइल्स फर्श पर अभ्यास किया, जहां चोट लगने का खतरा रहता था, लेकिन जज्बा कभी कमजोर नहीं पड़ा। उन्होंने अन्य बच्चियों को संदेश दिया कि मेहनत और विश्वास से हर मुकाम हासिल किया जा सकता है।

दुर्गा ने बताया कि वे एक छोटे से गांव से आई हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत नहीं थी, लेकिन सभी के सहयोग से आज यह मुकाम हासिल कर पाईं। मुंबई में उन्हें नीता अंबानी, सचिन तेंदुलकर और रोहित शर्मा से मिलने और सम्मान पाने का मौका भी मिला। दुर्गा येवले की कहानी यही सिखाती है कि जब हौसला जिंदा हो, तो अंधेरा भी रास्ता बन जाता है और मंजिल खुद चलकर पास आती है।

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