आदिमानव बने किसान, मुआवजा न मिलने पर अर्धनग्न होकर पत्ते लपेटकर प्रदर्शन, बोले सरकार हमें जंगल भेजना चाहती है

बुरहानपुर। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में पांगरी डेम परियोजना से प्रभावित किसान बीते तीन वर्षों से मुआवजे की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन जब उनकी सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने विरोध का अनोखा और चौंकाने वाला तरीका अपनाया। किसानों ने खुद को आदिमानव की तरह पेश करते हुए अर्धनग्न होकर शरीर पर पत्ते लपेटे और आरोप लगाया कि सरकार उन्हें जंगलों में भेजने की फिराक में है।

किसानों का कहना है कि उनकी जमीन डेम के डूब क्षेत्र में जा रही है, लेकिन इसके बदले उन्हें अब तक न तो उचित मुआवजा मिला और न ही पुनर्वास की कोई ठोस व्यवस्था की गई। इसी पीड़ा को उजागर करने के लिए प्रदर्शनकारियों ने कमर में केले के पत्ते बांधे और सिर पर सागवान के पत्ते लपेटकर दोगुना मुआवजे की मांग रखी। इससे पहले भी किसान भैंस के आगे बीन बजाकर अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं।

किसानों की मांग है कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में दोगुना मुआवजा, पोषण का अधिकार और सम्मानजनक पुनर्वास दिया जाए, लेकिन सरकार और किसानों के बीच यह टकराव लगातार गहराता जा रहा है।

इस पूरे मामले पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि प्रदेश के अन्नदाता भाजपा के तथाकथित सुशासन में अर्धनग्न होकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं, जबकि कृषि मंत्री अपने बंगले में आराम फरमा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह दृश्य सत्ता की संवेदनहीनता और किसान विरोधी मानसिकता को उजागर करता है।

उमंग सिंघार ने आगे कहा कि बुरहानपुर की पांगरी बांध परियोजना से प्रभावित किसान दो वर्षों से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत दोगुना मुआवजा और समुचित पुनर्वास किसानों का संवैधानिक अधिकार है, जिसे सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार कहा जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यूनतम मुआवजा थोपकर किसानों को आदिमानव जैसा जीवन जीने पर मजबूर करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।

कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार का यही रवैया जारी रहा तो आंदोलन और उग्र होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी, और कृषि मंत्री को बंगले से बाहर निकलकर किसानों की पीड़ा देखनी चाहिए, जो आज सम्मान और न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

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