दतिया। दतिया के मेडिकल कॉलेज में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की हालत दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारी लगातार कभी प्रशासन तो कभी मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है, सैलरी नहीं। हालात ऐसे बन गए हैं कि कर्मचारियों के सामने अपने परिवार का भरण-पोषण करना भी बड़ी चुनौती बन गया है।
कुछ दिन पहले आउटसोर्स कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर दतिया प्रशासन के पास पहुंचे थे, जहां कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने उन्हें तीन दिन का समय देने का आश्वासन दिया था, लेकिन 10 जनवरी 2026 तक भी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल सका। कर्मचारियों का कहना है कि बच्चों की फीस, घर का खर्च और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है, क्योंकि तीन महीने से उनकी सैलरी बंद है।
आउटसोर्स कर्मचारियों का आरोप है कि कभी बजट का हवाला दिया जाता है तो कभी किसी और बहाने से उन्हें टाल दिया जाता है। मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारी केवल आश्वासन दे रहे हैं और कर्मचारी लगातार दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। अब सवाल यही है कि जिला प्रशासन कब इन कर्मचारियों की सुध लेगा और कब उन्हें उनका हक का वेतन मिल पाएगा, ताकि वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें।

