ग्वालियर। ग्वालियर में जहां कुछ दिन पहले महिलाओं की योग मुद्राओं वाली वॉल पेंटिंग के साथ असामाजिक तत्वों ने शर्मनाक हरकत की थी, उसी स्थान पर अब सकारात्मक पहल देखने को मिली। शहर में ‘स्ट्रीट वॉल पेंटिंग’ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और युवाओं ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने दीवारों पर नई पेंटिंग बनाकर स्वच्छ पर्यावरण, सामाजिक जिम्मेदारी और शहर की गरिमा का संदेश दिया, साथ ही उन लोगों को भी जवाब दिया जिन्होंने महिलाओं की योग करती आकृतियों को नुकसान पहुंचाकर शहर की छवि खराब करने की कोशिश की थी।
दरअसल, ग्वालियर के नदी गेट इलाके में सड़क किनारे महिलाओं की योग मुद्राओं को दर्शाती पेंटिंग बनाई गई थीं, जो लोगों को स्वास्थ्य और योग के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ शहर की सुंदरता बढ़ा रही थीं। लेकिन कुछ दिन पहले असामाजिक तत्वों ने इन पेंटिंग्स के साथ अश्लील हरकत कर उन्हें खराब कर दिया था। इस घटना को आशी कुशवाह नाम की युवती ने देखा और उसकी रील बनाकर सोशल मीडिया पर साझा की, जिसके बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आया और लोगों ने इसका विरोध किया।
इसके बाद नगर निगम ने सबसे पहले खराब की गई पेंटिंग्स को दोबारा रंगवाया और फिर तुरंत प्रभाव से स्ट्रीट वॉल पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह प्रतियोगिता रविवार सुबह फूलबाग गुरुद्वारा, मोती महल पैलेस तिराहा से लेकर नदी गेट चौराहा तक आयोजित की गई, जिसमें शहर के युवा, कला प्रेमी और विभिन्न समूहों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
नगर निगम की ओर से फाइन आर्ट कॉलेज के छात्र-छात्राओं को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। नोडल अधिकारी मुकेश बंसल ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल पेंटिंग बनाना नहीं, बल्कि स्वच्छता, नागरिक दायित्व और शहर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना है। प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों ने स्वच्छता, सिंगल यूज प्लास्टिक का विरोध, खुले स्थानों पर कचरा न फेंकने, कचरे के पृथक्करण, जल संरक्षण, तंबाकू सेवन के खिलाफ जागरूकता और संस्कृति व धरोहर जैसे विषयों पर आधारित चित्र बनाए।
नगर निगम पार्क विभाग को पेंटिंग से छेड़छाड़ करने वाले असामाजिक तत्वों के सीसीटीवी फुटेज भी मिल गए हैं और जल्द ही उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। प्रतियोगिता में शामिल युवाओं ने कहा कि इस तरह की घटनाएं गलत मानसिकता को दर्शाती हैं और शहर का नाम खराब करती हैं। रंगों और कला के जरिए उन्होंने यह संदेश दिया है कि ग्वालियर की पहचान सकारात्मक सोच, संस्कार और सुंदरता से है, न कि गंदी हरकतों से।

