शहडोल। सरकार लगातार नवजात शिशुओं की सुरक्षा और स्तनपान के सही तरीकों को लेकर जागरूकता अभियान चला रही है। माताओं को समझाया जाता है कि बच्चे को सही अवस्था में गोद में लेकर या सुलाकर ही दूध पिलाएं और उसके बाद डकार जरूर दिलाएं, ताकि कोई खतरा न हो। इसके बावजूद कभी-कभी एक छोटी सी लापरवाही इतनी भारी पड़ जाती है कि मासूम की जान चली जाती है। ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला मध्य प्रदेश के शहडोल जिले से सामने आया है, जहां मां की एक चूक के कारण नवजात बच्ची की मौत हो गई।
यह घटना ब्यौहारी थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत कल्हारी के ग्राम सूखा की है, जहां सुनील कुमार पाल की नवजात बेटी प्रियांशी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। जानकारी के अनुसार 9 जनवरी को प्रियांशी को सूखा आंगनबाड़ी केंद्र में टीकाकरण कराया गया था। टीकाकरण के कुछ घंटों बाद ही बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी और वह पूरी रात रोती रही। परिजनों का कहना है कि रात करीब तीन बजे जब वे जागे तो बच्ची में कोई हलचल नहीं थी और उसकी सांसें थम चुकी थीं।
इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने आंगनबाड़ी की एएनएम पर गलत तरीके से टीकाकरण करने का आरोप लगाया। पिता सुनील पाल का कहना है कि टीका लगने के बाद ही बच्ची की हालत बिगड़ी थी। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए मौत की वजह कुछ और बताई है।
ब्यौहारी बीएमओ विशाल सिंह परिहार ने बताया कि बच्ची की मौत स्प्रेशन यानी दूध के श्वासनली में चले जाने से हुई है। उनके अनुसार मां ने गलत तरीके से लिटाकर दूध पिलाया, इसी दौरान दूध सांस की नली में चला गया और नवजात की अचानक मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी बच्ची के फेफड़ों में दूध भरा पाया गया है।
बीएमओ ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्ची को टीकाकरण का दूसरा डोज लगाया गया था और टीके के बाद कभी-कभी सामान्य रिएक्शन हो सकते हैं, लेकिन इस मामले में मौत का कारण टीकाकरण नहीं बल्कि गलत तरीके से स्तनपान कराना ही सामने आया है। यह घटना एक बार फिर चेतावनी देती है कि नवजात की देखभाल में छोटी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।

