राजगढ़। मध्य प्रदेश के राजगढ़ में किसानों ने आज ऐसा प्रदर्शन किया, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। अति वर्षा से बर्बाद हुई फसलों और बिजली कटौती की मार से परेशान किसानों ने अपने हक की लड़ाई को अनोखे अंदाज़ में उठाया। सैकड़ों किसान खिलचीपुर नाके पर इकट्ठा हुए और नारेबाजी करते हुए कलेक्टर कार्यालय की ओर बढ़े। लेकिन जब वे दफ्तर के गेट तक पहुंचे, तो अचानक सबने घुटनों के बल चलना शुरू कर दिया — कलेक्टर कार्यालय के अंदर तक। यह दृश्य उनकी बेबसी और दर्द की एक जीवंत तस्वीर बन गया।
किसानों का कहना है कि इस बार की भारी बारिश ने उनकी पूरी मेहनत को मिट्टी में मिला दिया है। सोयाबीन, गेहूं और दूसरी खरीफ फसलें पूरी तरह तबाह हो गईं, लेकिन अब तक न कोई सर्वे हुआ, न मुआवजा मिला। ऊपर से बिजली आपूर्ति की अव्यवस्था ने स्थिति और बिगाड़ दी है। किसानों ने बताया — “रात को बिजली चली जाती है, दिन में घंटों इंतज़ार करना पड़ता है, फसलों की सिंचाई अधूरी रह जाती है, और जो थोड़ी बहुत फसल बची है, वो भी बर्बाद होने की कगार पर है।”
गुस्से में भरे किसानों ने प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि अगर तय समय में सर्वे पूरा कर मुआवजा नहीं दिया गया, तो वे कलेक्टरेट परिसर में ही टेंट लगाकर अनिश्चितकालीन धरना देंगे। और इस बार विरोध का तरीका भी होगा अलग — धरने के साथ किसान सुंदरकांड का पाठ करेंगे, ताकि उनकी आवाज़ सत्ता के गलियारों तक पहुंचे।
राजगढ़ के इस शांत लेकिन सशक्त विरोध ने एक बार फिर ये साबित कर दिया है — जब किसान घुटनों के बल चल पड़ते हैं, तो पूरी व्यवस्था को झुकना ही पड़ता है।

