स्वच्छता सम्मान समारोह: सीएम डॉ. मोहन यादव ने सफाईकर्मियों का ब़ढ़ाया मान, बोले- दुनिया हमसे सीखेगी सफाई, गदगद हुए कर्मचारी, नगर निकायों को दी 7 हजार करोड़ रुपये की सौगात

भोपाल। भोपाल के रवींद्र भवन में 14 अक्टूबर को एक ऐसा नज़ारा देखने को मिला जिसने हर किसी के दिल में गर्व भर दिया। यहां आयोजित हुआ 5वां राज्य स्तरीय स्वच्छता सम्मान एवं कार्यशाला — ‘स्वच्छता समग्र समारोह’, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने पूरे प्रदेश के नगर निकायों को 7 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात दी और सफाईकर्मियों के अथक परिश्रम को सलाम किया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब पहली बार लाल किले से स्वच्छता की बात की थी, तभी देश में एक नए युग की शुरुआत हुई थी।” उन्होंने कहा कि स्वच्छता की इस यात्रा में मध्य प्रदेश ने नित नए कीर्तिमान रचे हैं। इंदौर ने लगातार देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है, वहीं उज्जैन, भोपाल और जबलपुर सहित 8 शहरों को इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण में पुरस्कार मिले हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने जबलपुर, उज्जैन, भोपाल, ग्वालियर, देवास, इंदौर, शाहगंज और बुदनी के जनप्रतिनिधियों और सफाई मित्रों को सम्मानित किया। मंच पर सफाईकर्मी सम्मान पाकर भावुक हो उठे, और तालियों की गूंज ने पूरे सभागार को स्वच्छता के जज़्बे से भर दिया।

डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में शहरों से लिगेसी वेस्ट यानी वर्षों से जमा कचरा पूरी तरह खत्म किया जाए। उन्होंने बताया कि इस बार 64 पुरस्कार स्वच्छता की अलग-अलग कैटेगरी में दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि दीपावली से पहले प्रदेश को साढ़े 22 हजार करोड़ रुपये की सौगात मिल रही है — जिसमें 10 हजार करोड़ की नमामि नर्मदे योजना, 7 हजार करोड़ की अमृत-2 योजना, और 5000 करोड़ की मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना शामिल है। उन्होंने बताया कि आने वाले तीन वर्षों में करीब 20 हजार करोड़ की नई योजनाएं मूर्त रूप लेंगी।

सिंहस्थ-2028 की तैयारियां युद्ध स्तर पर
मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ-2028 को लेकर कहा कि यह उज्जैन का ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। उन्होंने कहा — “जल ही जीवन का मूल है, और सिंहस्थ जैसे आयोजनों में नदियों में स्नान केवल आस्था नहीं, बल्कि संस्कृति का प्रतीक है। कुंभ का आयोजन इस बार इतना भव्य होगा कि दुनिया स्वच्छता और व्यवस्था के मामले में भारत से सीखेगी।”

कार्यक्रम में स्वच्छता अभियान पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। यह भी बताया गया कि 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश में स्वच्छता पखवाड़ा मनाया गया था, जिसमें सफाई मित्रों ने सबसे अहम भूमिका निभाई।

नदी-तालाबों की सफाई भी ज़रूरी
राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने कहा कि हमें केवल आस-पास की नहीं, बल्कि मानसिक स्वच्छता पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि जैसे इंदौर और भोपाल स्वच्छता के प्रतीक बन चुके हैं, वैसे ही हमें प्रदेश के हर शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाना है। उन्होंने सभी से अपील की कि अपने नदी-तालाबों को भी प्रदूषण से मुक्त रखें।

वर्षों से जमा कचरे को हटाने का संकल्प
अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने कहा कि मध्य प्रदेश पिछले 8 वर्षों से स्वच्छता में नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश में स्वच्छता के लिए एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा शुरू की है, और मध्य प्रदेश इस दौड़ में सबसे आगे है। उन्होंने बताया कि दीपावली की तरह अब प्रदेश के लगभग 40 नगरीय निकायों से वर्षों से जमा कचरा हटाने का अभियान शुरू हो चुका है, और डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन को और मज़बूत किया जाएगा।

अंत में उन्होंने कहा — “हम सिर्फ साफ शहर नहीं, बल्कि एक स्वच्छ और स्वस्थ मध्य प्रदेश बनाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं।”

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