विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा स्थित शासकीय कन्या महाविद्यालय में वार्षिक उत्सव के समापन के दौरान उस वक्त माहौल गरमा गया, जब कॉलेज के प्रिंसिपल बीडी अहिरवार ने छात्राओं को क्लासिक फिल्में मुगल-ए-आजम, उमराव जान और मैं आवारा हूं देखने की सलाह दी।
प्रिंसिपल की इस बात पर कार्यक्रम में मौजूद विश्व हिंदू परिषद की कार्यकर्ता और कॉलेज की पूर्व छात्रा महिमा दुबे भड़क उठीं और मंच पर खड़े होकर उन्होंने खुलकर विरोध दर्ज कराया।
महिमा दुबे ने कहा कि अगर समाज और इतिहास को दिखाने वाली फिल्मों की बात हो रही है, तो पृथ्वीराज चौहान, महाराणा प्रताप और रानी लक्ष्मीबाई जैसी प्रेरणादायक फिल्मों का जिक्र क्यों नहीं किया गया।
मंच पर अचानक हुए इस विरोध से वहां मौजूद शिक्षक और मुख्य अतिथि असहज नजर आए, जबकि हॉल में बैठी छात्राएं और अभिभावक भी हैरान रह गए।
बाद में प्रिंसिपल बीडी अहिरवार ने सफाई देते हुए कहा कि जिन फिल्मों का जिक्र किया गया, वे अपने दौर के सामाजिक परिदृश्य को दर्शाती हैं और उनसे छात्राएं उस समय के समाज को समझ सकती हैं।
वहीं महिमा दुबे का आरोप है कि प्रिंसिपल ने पूरे संदर्भ को नजरअंदाज करते हुए कुछ चुनिंदा फिल्मों का नाम लिया, जिससे सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील मुद्दों को बढ़ावा मिल सकता है, जो उचित नहीं है।
इस पर प्रिंसिपल ने पलटवार करते हुए कहा कि महिमा दुबे ने पूरा भाषण सुने बिना केवल चर्चा में आने के लिए मंच पर अनुशासनहीनता की।
फिलहाल यह पूरा मामला कॉलेज की अनुशासन समिति के पास पहुंच गया है, जहां दोनों पक्षों की सुनवाई होगी, वहीं इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर यह बहस भी छिड़ गई है कि शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं को किस तरह की फिल्मों की सलाह दी जानी चाहिए।

