भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पंचायत सचिवों के लिए बड़ी और ऐतिहासिक घोषणाएं की हैं। अब पंचायत सचिवों को सातवें वेतनमान के तहत सैलरी मिलेगी और उनकी रिटायरमेंट की आयु सीमा भी बढ़ा दी गई है। मुख्यमंत्री ने सचिवों को अग्रिम बधाई देते हुए कहा कि सरकार पंचायत व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को भोपाल के दशहरा मैदान में आयोजित प्रदेश स्तरीय पंचायत सचिव सम्मेलन में शामिल हुए थे। इस मंच से उन्होंने पंचायत सचिवों के लिए सौगातों का पिटारा खोल दिया। सीएम ने ऐलान किया कि अब पंचायत सचिव 62 वर्ष की उम्र में रिटायर होंगे और उन्हें 13 सितंबर 2023 से सातवें वेतनमान का लाभ दिया जाएगा। इसके साथ ही जिला कैडर का भी गठन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की आत्मा गांव में बसती है और प्रदेश की प्रगति के लिए गांवों की समृद्धि बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कारखाने और रोजगार के अवसर विकसित करना समय की मांग है। सीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि गरीब, महिला, युवा और गांव को केंद्र में रखकर फैसले लिए जा रहे हैं और पंचायतें इस विकास यात्रा की रीढ़ हैं।
सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कई बार लोग अपने परिवार से ज्यादा पंचायत सचिव पर भरोसा करते हैं और अपने मन की बात उनसे साझा करते हैं। इसलिए पंचायत सचिवों की जिम्मेदारी और भी बड़ी हो जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत सचिव की नजर हमेशा निष्पक्ष और जनहित में होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने किसान कल्याण वर्ष का उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें 16 विभागों को एकसाथ जोड़ा गया है।
सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि समयमान और संविलियन से जुड़े मामलों में जल्द ही परिणाम सामने आएंगे। पंचायत सचिवों को विशेष भत्ता दिया जाएगा और सेवा के दौरान मृत्यु होने पर मिलने वाली डेढ़ लाख रुपये की सहायता राशि अनुकंपा नियुक्ति के बाद वापस नहीं ली जाएगी। इसके साथ ही वृंदावन ग्राम योजना पंचायत सचिवों के माध्यम से लागू की जाएगी और हर पंचायत में सामुदायिक भवन तथा पंचायत भवन बनाए जाएंगे।
इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल भी मौजूद रहे। पंचायत सचिवों के लिए किए गए ये ऐलान प्रदेश की ग्राम पंचायत व्यवस्था को नई मजबूती देने वाले माने जा रहे हैं।

