प्रयागराज. मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम में स्नान को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। शनिवार को संगम पहुंचे ज्योतिष पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पुलिस प्रशासन ने स्नान से रोक दिया, जिसके बाद उनके समर्थकों और पुलिस के बीच कहासुनी हो गई। इसी घटनाक्रम के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अनशन पर बैठ गए, जो आज दूसरे दिन भी जारी है।
अनशन स्थल पर आयोजित प्रेस वार्ता में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन और हिंदू समाज दोनों पर तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि संतों के साथ दुर्व्यवहार किया गया है और प्रशासन को सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब गंगा स्नान के लिए भी अनुमति लेनी पड़ेगी, जबकि पालकी में स्नान के लिए जाना एक परंपरा रही है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि गौ-हत्या करने वालों से चंदा लिया जा रहा है और हिंदू समाज इसका विरोध करने के लिए आगे नहीं आता। उन्होंने कहा कि काशी की गलियों में 40 दिनों तक मंदिर बचाने के लिए आंदोलन किया गया, लेकिन कभी भी 100 से ज्यादा हिंदू साथ नहीं आए।
ज्ञानवापी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब रात में अतिक्रमण हटाने के दौरान ज्ञानवापी की तीन ईंटें गिर गईं, तो 10 हजार मुसलमान इकट्ठा हो गए। उन्होंने इसे धार्मिक एकजुटता का उदाहरण बताते हुए कहा कि मुसलमान अपने धर्म की रक्षा के लिए निकलते हैं, जबकि हिंदू गौ माता की हत्या जैसे मुद्दों पर भी सड़कों पर नहीं उतरते और इसी कारण हिंदुओं को उन्होंने कायर बताया।

