गणतंत्र दिवस पर आरोपी मंत्री को सलामी, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद भी सरकार बेपरवाह, क्या संविधान पर भारी पड़ा पार्टी का फरमान

इंदौर। मध्यप्रदेश में कानून के राज को लेकर एक बार फिर सियासी तूफान खड़ा हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केके मिश्रा ने सोशल मीडिया के जरिए राज्य सरकार और सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनके निशाने पर हैं मंत्री विजय शाह, जिनके खिलाफ पहले से आपराधिक प्रकरण दर्ज है, इसके बावजूद उन्हें गणतंत्र दिवस जैसे पावन अवसर पर सरकारी सम्मान दिया गया।

केके मिश्रा ने अपने ट्वीट में याद दिलाया कि वर्ष 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मंत्री द्वारा सेना की गरिमा और एक भारतीय बेटी को लेकर दिए गए विवादित बयान पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर ने स्वतः संज्ञान लिया था। हाईकोर्ट के निर्देश पर मंत्री विजय शाह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 152, 196(1)(बी) और 197(1)(सी) के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया गया था, जो अपने आप में न्यायिक प्रक्रिया की गंभीरता को दर्शाता है।

मामला यहीं नहीं रुका। एसआईटी जांच के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को मंत्री के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति पर दो सप्ताह के भीतर फैसला लेने और अदालत को जानकारी देने के निर्देश दिए। लेकिन कांग्रेस नेता के अनुसार तय समय सीमा बीत जाने के बावजूद सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया और पूरी तरह चुप्पी साध ली।

सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा होता है जब 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के दिन उसी मंत्री को उनके गृह जिले खंडवा में परेड के दौरान सलामी लेने के लिए तैनात किया गया। केके मिश्रा ने इसे कानून के राज का खुला मजाक बताते हुए पूछा है कि जिस दिन संविधान लागू हुआ, उसी दिन संविधान से ऊपर पार्टी का फरमान कैसे हो गया।

कांग्रेस नेता का कहना है कि यह सिर्फ एक मंत्री का मामला नहीं है, बल्कि यह संविधान, देशभक्ति, सेना के सम्मान और महिला स्वाभिमान पर सीधा प्रहार है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब सत्ता का अहंकार न्यायपालिका के आदेशों पर भारी पड़ने लगे, तो यह स्थिति पूरे गणतंत्र की सबसे बड़ी परीक्षा बन जाती है।

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