बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल से भ्रष्टाचार का चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक आदिवासी छात्रावास के बच्चों ने हिम्मत दिखाते हुए सीधे कलेक्टर से शिकायत की और वार्डन की सच्चाई सबके सामने आ गई। कलेक्टर के सामने छात्र, वार्डन और जनजातीय कार्य विभाग के जिम्मेदारों की पेशी हुई, जिसमें वार्डन की भ्रष्ट कार्यशैली साफ तौर पर उजागर हो गई और कलेक्टर ने तुरंत उसे निलंबित कर दिया।
दरअसल बैतूल के हमलापुर स्थित प्री मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास में करीब 60 छात्र पढ़ते हैं। सरकारी योजना के तहत हर छात्र के खाते में बिस्तर खरीदने के लिए 6-6 हजार रुपए ट्रांसफर किए गए थे, लेकिन वार्डन ने नियमों को ताक पर रखकर छात्रों से पैसे निकलवाए और खुद ही बिस्तर खरीदने का ऑर्डर एक अज्ञात फर्म को दे दिया। जबकि नियमानुसार वार्डन को छात्रों के खातों से इस तरह रुपए निकालने का कोई अधिकार नहीं था।
पैसे लेने के बावजूद छात्रों के लिए नए बिस्तर नहीं खरीदे गए और बच्चे ठंड के मौसम में पुराने और खराब बिस्तरों पर सोने को मजबूर रहे। जब कलेक्टर ने पूरे मामले की गंभीरता से सुनवाई की और छात्रों के परिजनों से फोन पर बात कर सच्चाई जानी, तो यह पुष्टि हो गई कि वार्डन के कहने पर ही छात्रों के खातों से पैसे निकलवाए गए थे।
वार्डन ने भी पैसे लेने की बात स्वीकार कर ली, जिसके बाद कलेक्टर ने बिना देर किए उसे सस्पेंड कर दिया। यह मामला न सिर्फ सिस्टम की खामियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि अगर बच्चे आवाज उठाएं, तो कार्रवाई तय है।

