जबलपुर। मध्यप्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों के इंपैनलमेंट को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।
हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि राज्य सरकार का यह फैसला जनता को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देने के उद्देश्य से लिया गया है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन अस्पतालों को इंपैनलमेंट या उसके नवीनीकरण को लेकर आपत्ति है, वे स्वयं अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
दरअसल, आयुष्मान योजना में अस्पतालों के लिए NABH सर्टिफिकेट को अनिवार्य किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी, लेकिन कोर्ट ने इस पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
जबलपुर निवासी देवेंद्र दत्त ने इस मामले में जनहित याचिका दायर की थी।
याचिका में 23 सितंबर और 10 अक्टूबर 2025 को जारी मध्यप्रदेश सरकार के आदेशों को चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ता का कहना था कि इंपैनलमेंट के लिए NABH सर्टिफिकेट की अनिवार्यता गलत है और इससे छोटे व मध्यम स्तर के अस्पतालों को नुकसान होगा।
हालांकि, हाईकोर्ट ने सभी दलीलों को खारिज करते हुए याचिका को निरस्त कर दिया।

