इंदौर। यूजीसी के नए नियमों के विरोध ने अब व्यापक रूप ले लिया है। शहर के ऐतिहासिक गांधी हॉल के बाहर सवर्ण समाज के विभिन्न संगठनों ने एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया।
बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे और सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी करते हुए अपना आक्रोश जाहिर किया।
प्रदर्शन के दौरान अलग-अलग समाजों ने अपने-अपने तरीकों से विरोध दर्ज कराया।
कायस्थ समाज के लोगों ने काले झंडे दिखाकर यूजीसी नियमों के खिलाफ नाराज़गी जताई।
वहीं करणी सेना से जुड़े प्रतिनिधियों ने नए प्रावधानों को सीधे तौर पर काला कानून करार दिया।
पूरा माहौल आक्रोश और विरोध की आवाज़ों से गूंजता नजर आया।
ब्राह्मण समाज के लोगों ने शंख बजाकर विरोध का शंखनाद किया और इसे शिक्षा व्यवस्था को बचाने की शुरुआत बताया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह केवल एक दिन का आंदोलन नहीं है, बल्कि यह संघर्ष लंबा चल सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी के नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों और पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ हैं।
संगठनों ने साफ चेतावनी दी कि यदि नियम वापस नहीं लिए गए, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए मौके पर प्रशासनिक अमला तैनात रहा।
सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम संभाग आयुक्त को ज्ञापन सौंपने की बात कही, जिसमें यूजीसी नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग की जाएगी।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और सरकार ने समय रहते फैसला नहीं बदला तो यह आंदोलन लंबी लड़ाई में तब्दील हो जाएगा।
वहीं यूजीसी बिल को लेकर पूर्व मंत्री और विधायक हरदीप सिंह डंग ने कहा कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि यह कानून सभी वर्गों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि बिल पर केंद्रीय नेतृत्व स्तर पर लगातार चर्चा चल रही है और जो स्पष्टीकरण दिया गया है, वह जनता के लिए पर्याप्त है।
उन्होंने यह भी कहा कि अब जरूरत है जनता के बीच जाकर यूजीसी बिल को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने की।

