भोपाल। यूजीसी के नए नियमों को लेकर देशभर में मचे बवाल के बीच सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इन नियमों पर रोक लगा दी है।
इसी बीच बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने मुंबई से भारत सरकार को खास संदेश दिया है।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने यूजीसी के नए नियमों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत में किसी भी तरह का बंटवारा नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि क्या क्षत्रिय, क्या ब्राह्मण, क्या वैश्य, इस तरह की चर्चा समाज को तोड़ने वाली है।
भारत में असमानता नहीं, केवल समानता होनी चाहिए और हम सब एक हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में न कोई अगड़ा हो, न पिछड़ा हो, केवल भारतीय हो, यही उनकी प्रार्थना है।
धीरेंद्र शास्त्री ने केंद्र सरकार से अपील करते हुए कहा कि भारतीयों को बांटा न जाए बल्कि जोड़ा जाए।
उन्होंने कहा कि हम सब हिंदू एक हैं और एकता के लिए उन्होंने सात समाजों की बेटियों का विवाह भी करवाया है, ताकि समाज में एकजुटता का संदेश जाए।
इधर सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगाए जाने के बाद सवर्ण समाज में जश्न का माहौल देखा जा रहा है।
राजधानी भोपाल के बोर्ड ऑफिस चौराहे पर शाम साढ़े चार बजे जश्न मनाने की तैयारी की गई है, जहां ढोल की थाप पर लोग नाचेंगे और आतिशबाजी की जाएगी।
वहीं दूसरी ओर दलित नेता दामोदर यादव ने यूजीसी नियमों को लेकर अलग राय रखी है।
उन्होंने कहा कि कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के छात्रों के साथ जातिगत भेदभाव होता है।
नंबर कम-ज्यादा किए जाते हैं और रैगिंग जैसी घटनाएं सामने आती हैं, इसी को रोकने के लिए नियमों में बदलाव किया गया था।
दामोदर यादव ने कहा कि सरकार ने कुछ हद तक सुरक्षा कवच देने का प्रयास किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है।
उन्होंने मांग की कि यूजीसी के नए नियमों को जारी रखा जाए और अगर ऐसा संभव नहीं है तो ईडब्ल्यूएस आरक्षण को खत्म किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 13 जनवरी 2026 को विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भेदभाव रोकने के लिए नए नियम जारी किए थे।
इन नियमों में 2012 के प्रावधानों की जगह जाति आधारित भेदभाव को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया, जिसके बाद देशभर में विवाद खड़ा हो गया।
देशव्यापी विरोध और बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी है।
कोर्ट ने इस मामले में एक कमेटी बनाने के निर्देश भी दिए हैं और फिलहाल 2012 के यूजीसी रेगुलेशन ही लागू रहेंगे।
अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।

