भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजधानी भोपाल में आईएफएस सर्विस मीट 2026 और वानिकी सम्मेलन का शुभारंभ किया। आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने वन विभाग के आईएफएस थीम गीत का विमोचन किया और लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड भी प्रदान किए। इस मौके पर प्रदेश के कई वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि वन सेवा प्रकृति से सीधे जुड़ने का माध्यम है। जीवन में वानप्रस्थ हमें प्रकृति के और करीब ले जाता है। उन्होंने कहा कि जो आनंद वन और जंगल के साथ आता है, वह कहीं और जाकर नहीं मिल सकता। जल से जंगल और जंगल से जीवन जुड़ा है, इस भाव को समझना बेहद जरूरी है।
सीएम ने इस दौरान एक रोचक वाक्या भी साझा किया। उन्होंने बताया कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वे अपने वाहन से जा रहे थे और सामने टाइगर अपने ही अंदाज में चल रहा था। ऐसे हालात में वन अमले की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। जानवरों के बीच काम करना एक बड़ी चुनौती है, जहां निडरता और संयम दोनों की जरूरत होती है। जानवर अपनी जिंदगी की मस्ती में रहते हैं और इंसान अपने जीवन का आनंद लेता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की ग्रोथ देश में सबसे बेहतर है। चीता लगातार दौड़ रहा है और मगरमच्छों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ना एक बड़ी चुनौती रही है। जब विभाग सही तरीके से काम करता है, तो मगरमच्छ नर्मदा की धारा में सुरक्षित विचरण करते नजर आते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि चंबल में घड़ियालों का संरक्षण भी इसका बड़ा उदाहरण है। मगरमच्छों को छोड़ने के समय कई सवाल खड़े होते हैं, खासकर नर्मदा परिक्रमा करने वालों को लेकर, लेकिन जल की शोभा जल में जीवन से है और जंगल की शोभा वहां मौजूद वन्य जीवों से। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज आईएफएस अधिकारियों के साथ जमीनी स्तर का अमला मिलकर काम कर रहा है, यही वन संरक्षण की सबसे बड़ी ताकत है।

