कांग्रेस में टिकट बंटवारे पर घमासान, मारपीट और 5 करोड़ में टिकट बेचने के आरोप पर मदन मोहन झा ने कहा- आरोप निराधार

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में सीट बंटवारे और टिकट वितरण को लेकर विवाद बढ़ गया है। खासकर कांग्रेस में टिकट को लेकर अंदरूनी कलह खुलकर सामने आई है। बुधवार को पटना एयरपोर्ट पर कांग्रेस नेताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसमें मारपीट की नौबत तक आ गई। आरोप लगाया गया कि टिकट बेचने के नाम पर करोड़ों की डील हुई।

पटना एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी का माहौल तब बन गया जब दिल्ली से लौटे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, प्रभारी कृष्ण अल्लावरु और कांग्रेस विधायक दल के नेता डॉ. शकील अहमद खान का पार्टी के ही कार्यकर्ताओं ने घेराव कर लिया। खासतौर पर बिक्रम से आए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इन नेताओं पर 5 करोड़ रुपये लेकर टिकट बेचने का आरोप लगाया।

मौके पर पप्पू यादव के समर्थक मनीष एयरपोर्ट पर कांग्रेस नेताओं को रिसीव करने आए थे, तभी वहां मौजूद अशोक आनंद के समर्थकों ने मनीष को दौड़ाकर पीटना शुरू कर दिया। देखते ही देखते माहौल गर्म हो गया और दोनों गुटों में हाथापाई शुरू हो गई। इस दौरान शकील अहमद को भी भीड़ ने घेर लिया, जिन्हें सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह गाड़ी में बैठाकर बाहर निकाला। विवाद की जड़ बिक्रम विधानसभा सीट बताई जा रही है। यहां से डॉ. अशोक आनंद लंबे समय से तैयारी कर रहे थे, लेकिन पार्टी ने टिकट अनिल शर्मा को दे दिया। नाराज समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

विरोध कर रही कुछ महिलाओं नेताओं ने आरोप लगाया कि 5 करोड़ लेकर टिकट बेचा गया और पुराने मेहनती कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर बाहरी लोगों को टिकट दे दिया गया।

इस मामले में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा ने साफ कहा कि टिकट वितरण को लेकर कोई विवाद नहीं है। उन्होंने बताया कि पूरी प्रक्रिया बैठक के बाद तय की गई और टिकट बेचने का आरोप पूरी तरह निराधार है। जब उनसे मुकेश साहनी को कांग्रेस कोटे से टिकट देने के सवाल पर पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल शीर्ष नेतृत्व कर सकता है।

इस बीच महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर बैठकें जारी हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम, विधायक दल के नेता शकील अहमद खान और प्रभारी कृष्ण अल्लावरु नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के आवास पर देर रात तक बैठक में शामिल रहे। महागठबंधन में सीटों पर अभी भी स्पष्टता नहीं बन पाई है। कुल मिलाकर कांग्रेस में टिकट बंटवारे को लेकर अंदरूनी कलह और सार्वजनिक विरोध पार्टी की छवि के लिए गंभीर चुनौती बन गई है और यह चुनावी माहौल में दोनों पक्षों के लिए चिंता का विषय है।

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