इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन के तीन दिवसीय GrainEx India कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया, लेकिन मंच पर सिर्फ औपचारिक बातें नहीं हुईं।
दाल कारोबारियों ने सीधे सरकार के सामने अपनी परेशानियां रखीं और मंडी टैक्स में राहत के साथ शहर के बीच चल रही अनाज मंडी को बाहर शिफ्ट करने की मांग खुलकर उठाई।
कार्यक्रम की प्रदर्शनी में दाल मिल उद्योग से जुड़ी आधुनिक मशीनें और नई तकनीकें दिखाई गईं, देशभर से व्यापारी और उद्योग प्रतिनिधि पहुंचे, लेकिन असली चर्चा नीतियों और टैक्स के बोझ पर ही होती रही।
मंच से मंत्री तुलसी सिलावट ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में निवेश बढ़ने की बात कही और इस साल को किसानों को समर्पित बताया, वहीं कारोबारियों का साफ संदेश था कि टैक्स का दबाव कम होगा तभी निवेश बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में इंदौर की ऐतिहासिक विरासत और देवी अहिल्याबाई होलकर के सुशासन मॉडल का जिक्र करते हुए व्यापारियों का स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उपभोक्ता देश है और दाल हमारे भोजन का प्रमुख प्रोटीन स्रोत है, साथ ही मध्य प्रदेश अब देश का फूड बास्केट बन चुका है।
सीएम ने बताया कि तुअर पर टैक्स हटाने के बाद अब मसूर पर भी राहत देने की दिशा में सरकार काम कर रही है, जिसे व्यापारियों ने उम्मीद भरे संकेत के रूप में देखा।
मुख्यमंत्री ने दाल उत्पादन बढ़ाने पर जोर देते हुए मसूर और उड़द की खेती के लिए बोनस योजना पर विचार और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की रणनीति का भी जिक्र किया।
मंच से व्यापारियों को संदेश दिया गया कि फैक्ट्रियां लगाइए, आधुनिक मशीनें लगाइए और प्रोसेसिंग बढ़ाइए, सरकार सहयोग करेगी।
अब नजर इस बात पर है कि घोषणाओं से आगे बढ़कर टैक्स और मंडी नीति पर सरकार कब ठोस फैसला लेती है, क्योंकि इंदौर के इस मंच से साफ हो गया कि दाल कारोबार अब सिर्फ व्यापार नहीं बल्कि नीति और राजनीति का भी बड़ा मुद्दा बन चुका है।

