NGT का बड़ा आदेश, भोपाल के केरवा कलियासोत डैम कैचमेंट में अवैध भराव और अतिक्रमण पर रोक

भोपाल। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भोपाल के कलियासोत और केरवा डैम क्षेत्र में अवैध मिट्टी भराव और ठोस कचरा डंपिंग के गंभीर मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा आदेश पारित किया है। यह कार्रवाई याचिकाकर्ता रशीद नूर खान की याचिका पर हुई, जिसमें बताया गया था कि महुआखेड़ा क्षेत्र में स्थित केरवा डैम के फुल टैंक लेवल और आसपास के कैचमेंट इलाके में हजारों डंपरों के जरिए कोपरा, मुर्रम और काली मिट्टी डाली गई।

एनजीटी के सामने यह तथ्य आया कि इस अवैध भराव का मकसद जलाशय और उसके कैचमेंट क्षेत्र को समतल कर भविष्य में प्लॉटिंग और निर्माण गतिविधियों का रास्ता बनाना था। ट्रिब्यूनल ने माना कि यह गतिविधियां वेटलैंड संरक्षण नियम 2017, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 और जल प्रदूषण निवारण अधिनियम 1974 का सीधा उल्लंघन हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित संयुक्त समिति की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि केरवा डैम के फुल टैंक लेवल की चिन्हित सीमा के भीतर भी करीब दस फीट तक ऊंचा अवैध भराव मौजूद है। समिति ने चेताया कि इससे जलाशय की भंडारण क्षमता, संरचनात्मक सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

एनजीटी ने साफ कहा कि भले ही कुछ भराव निजी जमीन पर किया गया हो, लेकिन अगर उसका असर डैम, जलाशय, कैचमेंट क्षेत्र या एफटीएल पर पड़ता है तो वह अवैध ही माना जाएगा। ट्रिब्यूनल ने माना कि 33 मीटर बफर जोन का उल्लंघन हुआ है और मिट्टी व कोपरा हटाने के लिए जारी नोटिस पूरी तरह वैध हैं।

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि केरवा डैम वेटलैंड श्रेणी का जल निकाय है और इसका संरक्षण अनिवार्य है। यह डैम भोपाल के लिए वैकल्पिक पेयजल स्रोत है और हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई से भी जुड़ा हुआ है, ऐसे में कैचमेंट क्षेत्र में अतिक्रमण और अवैध भराव डैम की आयु और जल भंडारण क्षमता को सीधे नुकसान पहुंचाता है।

एनजीटी ने जल संसाधन विभाग को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया कि केरवा डैम के एफटीएल क्षेत्र में महीने में कम से कम दो बार विशेष पेट्रोलिंग टीम के जरिए नियमित निगरानी की जाए और किसी भी अवैध डंपिंग या अतिक्रमण पर तुरंत कार्रवाई हो।

जिला कलेक्टर, वन विभाग और पंचायत अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में कैचमेंट एरिया से अवैध अतिक्रमण हटाने, वृक्षारोपण और मृदा संरक्षण के दीर्घकालिक उपाय लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य वेटलैंड प्राधिकरण को दो माह के भीतर केरवा डैम क्षेत्र की पहचान और सीमांकन की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है, ताकि भविष्य में अनियंत्रित विकास पर रोक लग सके। वहीं मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को क्षेत्र की लगातार निगरानी कर नियम उल्लंघन पर त्वरित वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं।

ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए दोहराया कि स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है और राज्य किसी भी बहाने से पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता।

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